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राजधानी के केंद्र सेंट्रल पार्क में उत्तराखंड की सांस्कृतिक चेतना, उत्तरायणी महोत्सव 2026ने रचा इतिहास

सेंट्रल पार्क में हजारों दर्शकों के बीच भव्य रूप से संपन्न हुआ राष्ट्रीय उत्तरायणी महोत्सव 2026

Amar sandesh नई दिल्ली ।देश की राजधानी दिल्ली के हृदय स्थल कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में आयोजित राष्ट्रीय उत्तरायणी महोत्सव 2026 का 14 जनवरी को भव्य, गरिमामय और ऐतिहासिक समापन हुआ। हजारों दर्शकों की मौजूदगी में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय चेतना ने राजधानी के केंद्र में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई।

वर्ष 2005 से निरंतर संचालित उत्तरायणी अभियान की यह कड़ी इस वर्ष राष्ट्रीय स्वरूप में आयोजित की गई, जिसने उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को देश की राजधानी में व्यापक पहचान दिलाई। यह आयोजन पर्वतीय लोक विकास समिति और सुखी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम के मंच संचालन और समग्र दिशा निर्धारण में पर्वतीय लोक विकास समिति के अध्यक्ष सूर्य प्रकाश सेमवाल की प्रमुख भूमिका रही, जबकि आयोजन की संकल्पना, राजनीतिक समन्वय और मार्गदर्शन में समिति के परामर्शदाता राजेश्वर पैन्यूली का योगदान निर्णायक रहा।

महोत्सव में गढ़वाल लोकसभा सांसद अनिल बलूनी, दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज और दिल्ली सरकार के पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

इस अवसर पर अनिल बलूनी ने उत्तराखंड की संस्कृति पर विस्तार से व्याख्यान देते हुए कहा कि उत्तराखंड की लोकपरंपराएं, पर्व, लोकगीत और लोकनृत्य केवल सांस्कृतिक धरोहर नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक आत्मा को समृद्ध करने वाले जीवंत अध्याय हैं। उत्तरायणी जैसे पर्व समाज को जोड़ने, नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का कार्य करते हैं।

उन्होंने राजधानी दिल्ली में इस प्रकार के आयोजनों को उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान के लिए अत्यंत आवश्यक बताते हुए आयोजकों के प्रयासों की सराहना की।

महोत्सव का प्रमुख आकर्षण पौराणिक नाट्य-रूपांतरण “पांडव कथा ,चक्रव्यूह” रहा, जिसमें वीर अभिमन्यु की चक्रव्यूह में प्रवेश और वीरगति को शुद्ध गढ़वाली संवादों, आधुनिक प्रकाश और ध्वनि तकनीक के माध्यम से प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया गया। इस नाट्य प्रस्तुति का निर्देशन राकेश भट्ट के सान्निध्य में हुआ, जिसमें 30 से अधिक कलाकारों ने जीवंत अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम में मां नंदा देवी की डोली यात्रा, विभिन्न राज्यों की मातृशक्ति द्वारा लोकनृत्य एवं लोकगीतों की प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक विविधता का अनुपम दृश्य प्रस्तुत किया। साथ ही सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रनिर्माण के क्षेत्र में योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को राष्ट्र गौरव, दिल्ली गौरव और हिमालय गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया।

आयोजकों के अनुसार पूरे दिन सेंट्रल पार्क में सांस्कृतिक उल्लास और जनसहभागिता का वातावरण बना रहा। समापन अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि राष्ट्रीय उत्तरायणी महोत्सव को भविष्य में और अधिक व्यापक, भव्य और समावेशी स्वरूप दिया जाएगा।

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