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-डॉ. के सी पांडेय
नई दिल्ली, 2 फरवरी,।दिल्ली विश्वविद्यालय के श्याम लाल कॉलेज के अंग्रेजी विभाग और IQAC द्वारा भारतीय भाषा समिति (शिक्षा मंत्रालय, भारत भारत सरकार) के सहयोग से दो-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ। “विरासत से क्षितिज तक: भारतीय भाषाएं और लोककथाएं” (From Heritage to Horizon: Indian Languages & Folklores) विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश के प्रख्यात शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने शिरकत की।
कार्यक्रम का आरंभ कॉलेज के बहुउद्देशीय हॉल में दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना और विश्वविद्यालय कुलगीत के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. के.जी. सुरेश (निदेशक, इंडिया हैबिटेट सेंटर) उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में प्रो. बलराम पाणि (डीन ऑफ कॉलेजेज, दिल्ली विश्वविद्यालय), प्रो. नंदिनी साहू (कुलपति, हिंदी विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल), और फिनलैंड, थाईलैंड व नेपाल के अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि जैसे प्रो. केजो वारिस, डॉ. विसुतिचाई चैयासित, और डॉ. टीकाराम पौडेल शामिल हुए।
IQAC निदेशक प्रो. कुशा तिवारी ने सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए भारतीय भाषा समिति के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भाषाओं के ‘वि-उपनिवेशीकरण’ (Decolonisation) के माध्यम से ही हम अपनी स्वदेशी शैक्षणिक और शैक्षणिक प्रणालियों को पुनर्जीवित कर सकते हैं।
कॉलेज के प्राचार्य प्रो. रबी नारायण कर ने अपने स्वागत भाषण में दैनिक जीवन में लोककथाओं की प्रासंगिकता और बहुभाषी परिवेश में इनके महत्व पर प्रकाश डाला।
प्रो. नंदिनी साहू (मुख्य वक्ता) ने स्पष्ट किया कि लोककथाएं केवल नाच-गाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक अत्यंत वैज्ञानिक और शैक्षणिक अध्ययन का क्षेत्र है।
प्रो. के.जी. सुरेश (मुख्य अतिथि) ने अंग्रेजी और भारतीय भाषाओं के बीच के कृत्रिम द्वंद्व को समाप्त करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ‘फोल्कलॉर’ एक पश्चिमी शब्द है जो ऊंच-नीच का भेद पैदा करता है, जबकि भारतीय अवधारणा ‘लोक’ समावेशी है और हमारी संस्कृति का वाहक है।
प्रो. बलराम पाणि ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में लोक परंपराओं को जीवन जीने का तरीका बताते हुए इन्हें अपनी जड़ों से जुड़ने का माध्यम बताया सत्र के दौरान सभी गणमान्य अतिथियों द्वारा ‘बुक ऑफ एब्सट्रैक्ट्स’ (Book of Abstracts) का विमोचन किया गया, जिसमें सम्मेलन में पढ़े जाने वाले शोध पत्रों का संकलन है।
सम्मेलन के संयोजक डॉ. रोहित जहरी ने शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा भेजे गए प्रोत्साहन पत्र को पढ़ा और सभी अतिथियों व आयोजन समिति का धन्यवाद ज्ञापित किया। यह सम्मेलन 3 फरवरी तक जारी रहेगा, जिसमें विभिन्न तकनीकी सत्रों के माध्यम से भारतीय लोक विरासत पर मंथन किया जाएगा।
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