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दिल्ली विश्वविद्यालय के श्याम लाल कॉलेज (सांध्य) के इतिहास विभाग की अकादमिक संस्था “साक्ष्य” ने आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के सहयोग से “इतिहास और इतिहास लेखन के बदलते आयाम” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया ।
सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कॉलेज के प्राचार्य प्रो. नचिकेता सिंह ने अपने स्वागत वक्तव्य में इतिहास और इतिहासलेखन के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एक अच्छे इतिहासकार को आलोचनात्मक और शोधोन्मुखी दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और साथ ही उसे इतिहास और राजनीति के अंतर्संबंध को भी समझना चाहिए ।
इस आयोजन के मुख्य वक्ताओं में प्रो.राजीव वर्मा ने सर्वप्रथम अपने विचारों को व्यक्त करते हुए बताया कि इतिहास को “अतीत और वर्तमान के बीच एक सतत संवाद” के रूप में दर्शाया गया है। उन्होंने वैज्ञानिक और शोध आधारित इतिहास लेखन की आवश्यकता पर बल दिया । उन्होंने राष्ट्रवादी, धर्मनिरपेक्ष और मार्क्सवादी इतिहास लेखन पर भी चर्चा की।
दूसरे वक्ता के रूप में प्रो.भुवन कुमार झा ने ऐतिहासिक वृत्तांतों को नया रूप देने में विचारधारा की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया । उन्होंने बताया कि 1857 के विद्रोह जैसी घटनाओं की व्याख्या राष्ट्रवादी और उपनिवेशवाद-विरोधी जैसे वैचारिक दृष्टिकोण के आधार पर अलग-अलग तरीके से की जा सकती है । तीसरे वक्ता के रूप में प्रो. विपुल सिंह ने पर्यावरणीय इतिहास और मानव-केंद्रित दृष्टिकोणों पर विशेष बल देते हुए ऐतिहासिक विकास को प्रभावित करने वाले कारकों को तरफ ध्यान दिलाया और प्रशिक्षित इतिहासकारों के लिए गैर-इतिहासकारों द्वारा लिखे गए इतिहास का आलोचनात्मक मूल्यांकन करने पर बल दिया।
प्रश्नोत्तरी सत्र में विद्यार्थियों ने एआई की भूमिका, विभिन्न दृष्टिकोणों से इतिहास के तरीकों और इतिहास और भू-राजनीति के बीच संबंधों से उपजी जिज्ञासाओं को दूर किया।इस आयोजन के संयोजक इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार थे।
डॉ. देव नारायण सिंह ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी वक्ताओं,सहकर्मियों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया ।इस आयोजन में कॉलेज के विभिन्न विभागों के सदस्य और विद्यार्थियों को बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।
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