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अफगानिस्तान से भारत तक: मलिक मुहम्मद की शैक्षणिक यात्रा*
मलिक मुहम्मद एक प्रतिभाशाली, बहुमुखी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय शोधार्थी हैं, जिनकी शैक्षणिक यात्रा, साहित्यिक अभिरुचि और मानवीय संवेदनशीलता उन्हें समकालीन युवा शोधकर्ताओं में एक विशिष्ट स्थान प्रदान करती है। वे केवल एक विद्यार्थी या शोधकर्ता ही नहीं, बल्कि एक सजग विचारक, संवेदनशील साहित्यप्रेमी और सामाजिक सरोकारों से जुड़े हुए व्यक्ति हैं। उनके व्यक्तित्व में अनुशासन, परिश्रम, जिज्ञासा और विनम्रता का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है।
मलिक मुहम्मद मूलतः अफ़ग़ानिस्तान के लग़मान (Laghman) प्रांत से संबंध रखते हैं। उनका जन्म एक संस्कारित, सम्मानित और संयुक्त परिवार में हुआ, जहाँ पारिवारिक मूल्यों, आपसी प्रेम और सम्मान की भावना को अत्यंत महत्व दिया जाता है। उनके माता-पिता ने उन्हें बचपन से ही शिक्षा, नैतिकता और मानवता के उच्च आदर्शों के प्रति प्रेरित किया।यद्यपि उनका पैतृक निवास लग़मान में है, किंतु उनका परिवार लंबे समय से काबुल में निवास करता रहा है। इस प्रकार उनका बचपन काबुल और लग़मान की सामाजिक एवं सांस्कृतिक विविधता के बीच व्यतीत हुआ, जिसने उनके व्यक्तित्व को व्यापक दृष्टिकोण प्रदान किया।
लग़मान अफ़ग़ानिस्तान के पूर्वी भाग में स्थित एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक प्रांत है। यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता, हरित वादियों और सांस्कृतिक विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यह उत्तर में नूरिस्तान, पूर्व में कुनार, दक्षिण में नंगरहार और पश्चिम में काबुल से घिरा हुआ है। यहाँ का अधिकांश भाग पर्वतीय है, किन्तु अलींगर और अलीशिंग नदियों के कारण उपजाऊ घाटियाँ भी पाई जाती हैं। यह क्षेत्र ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहाँ सम्राट अशोक के काल के शिलालेख प्राप्त हुए हैं। यहाँ पश्तून, पशई और ताजिक समुदायों के लोग निवास करते हैं।
इस प्रकार, लग़मान एवं काबुल की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत ने मलिक मुहम्मद के व्यक्तित्व में संवेदनशीलता और जड़ों से जुड़ाव की भावना विकसित की।
मलिक मुहम्मद बहुभाषी प्रतिभा के धनी हैं। उनकी मातृभाषा पख़्तो है, जिसके अतिरिक्त वे निम्नलिखित भाषाओं में दक्ष हैं…
दरी (फ़ारसी),हिंदी,उर्दू और अंग्रेज़ी भाषाओं पर उनकी यह सुदृढ़ पकड़ न केवल उनके अकादमिक कार्य में सहायक रही है, बल्कि उन्हें विभिन्न संस्कृतियों और साहित्यिक परंपराओं को समझने में भी सक्षम बनाती है।
मलिक मुहम्मद की प्रारंभिक शिक्षा काबुल एवं लग़मान में हुई। उन्होंने 22 दिसंबर 2014 को हज़रत इब्राहिम ख़लीलुल्लाह हायस्कूल, काबुल से अपनी हायस्कूल की पढ़ाई पूर्ण की। इस स्तर पर ही उन्होंने अध्ययन के प्रति गंभीरता और अनुशासन का परिचय देना प्रारंभ कर दिया था।
वर्ष 2015-2019 के बीच में नंगरहार विश्वविद्यालय, अफ़ग़ानिस्तान के हिंदी विभाग, भाषा एवं साहित्य संकाय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इसी दौरान हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति उनकी गहरी रुचि विकसित हुई।
उपन्यास और कथा साहित्य ने उनके मन पर गहरा प्रभाव डाला। यह रुचि धीरे-धीरे उनके जीवन का उद्देश्य बन गई।
एक वर्ष स्नातक अध्ययन के दौरान वर्ष 2018–2019 में उन्हें एक वर्ष की प्रतिष्ठित फेलोशिप प्राप्त हुई, जिसके अंतर्गत वे भारत के केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा आए। यहाँ उन्होंने हिंदी स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया। यह अवधि उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ सिद्ध हुई। भारत की सांस्कृतिक विविधता, हिंदी भाषा का व्यावहारिक प्रयोग और साहित्यिक वातावरण ने उनके व्यक्तित्व और ज्ञान को एक नई दिशा प्रदान की।
वर्ष 2020-2022 के बीच उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग से हिंदी में परास्नातक (एम.ए.) की उपाधि प्राप्त की। इस दौरान उन्होंने अत्यंत लगन, अनुशासन और नियमितता के साथ अपने अध्ययन को पूर्ण किया।वे एक गंभीर, जिज्ञासु और आलोचनात्मक दृष्टि से संपन्न विद्यार्थी के रूप में उभरे। उनकी शोध-रुचि और विश्लेषणात्मक क्षमता इस स्तर पर और अधिक परिपक्व हुई।
एम.ए. पूर्ण करने के पश्चात, अगस्त 2022 में उनका चयन बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ में पीएच.डी. शोधार्थी के रूप में हुआ। “हिंदी उपन्यास और स्त्री-पुरुष संबंध” यह विषय हिंदी साहित्य के समकालीन सामाजिक विमर्श को समझने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके शोध का उद्देश्य हिंदी उपन्यासों में स्त्री-पुरुष संबंधों की सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और वैचारिक परतों का विश्लेषण करना है।
मलिक मुहम्मद ने अब तक 25 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों में सक्रिय सहभागिता की है। उन्होंने अनेक मंचों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए हैं, जो उनकी अकादमिक सक्रियता का प्रमाण है। “भावक” पत्रिका, आगरा में “एक पत्नी के नोट्स में स्त्री-पुरुष प्रेम” शीर्षक से शोध आलेख प्रकाशित हो चुके हैं।
अंतरराष्ट्रीय युवा नेतृत्व सम्मेलन (हरियाणा) में “Youth for Peace Building” विषय पर शोध प्रस्तुत किया। ICSSR प्रायोजित अनुसंधान पद्धति पाठ्यक्रम में सहभागिता निभाई। भोपाल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में “विश्व के विभिन्न देशों में हिंदी” विषय पर प्रस्तुति की। पुस्तक “विश्व में हिंदी” , “अफ़ग़ानिस्तान में हिंदी की स्थिति” शीर्षक से लेख प्रकाशित हुए हैं। क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, लखनऊ की कार्यशाला में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
मलिक मुहम्मद की साहित्यिक रुचि बहुआयामी है। वे विशेष रूप से उपन्यास, कहानी, यात्रा-वृत्तांत, नाटक, संस्मरण रुचि रखते हैं।
साहित्य उनके लिए केवल अध्ययन का विषय नहीं, बल्कि आत्म-अभिव्यक्ति और समाज को समझने का माध्यम है।
वे खेलकूद में भी सक्रिय रुचि रखते हैं। उन्हें विशेष रूप से—
क्रिकेट, फुटबॉल, हाॅलीबॉल, बैटमिंटन पसंद हैं। खेल उनके व्यक्तित्व में ऊर्जा और संतुलन बनाए रखने में सहायक हैं।
मलिक मुहम्मद को यात्रा करना अत्यंत प्रिय है। उन्होंने विभिन्न देशों एवं भारत के अनेक राज्यों का भ्रमण किया है। उन्होंने ईरान, तुर्की तथा भारत के अनेक ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का अवलोकन किया है। भारत में उनके भ्रमण स्थलों में दिल्ली, मथुरा, वृंदावन, आगरा, वाराणसी, प्रयागराज, शिमला, मनाली, ऋषिकेश, हरिद्वार, जयपुर, अजमेर, भोपाल, पुरी आदि प्रमुख हैं। इन यात्राओं ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक और अनुभवों को समृद्ध बनाया है।
मलिक मुहम्मद का जीवन उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं है। वे
अधिक से अधिक ज्ञान अर्जित करना चाहते हैं, विभिन्न संस्कृतियों को समझना चाहते हैं, समाज के कमजोर वर्गों की सहायता करना चाहते हैं, साहित्य के माध्यम से सामाजिक चेतना का प्रसार करना चाहते हैं।
पारिवारिक मूल्य वे अपने माता-पिता, भाई-बहनों और परिवार के सभी सदस्यों का अत्यंत सम्मान करते हैं। उनके जीवन में पारिवारिक संस्कारों और मूल्यों का विशेष स्थान है, जो उन्हें संतुलित और संवेदनशील बनाते हैं।
समग्र रूप से, मलिक मुहम्मद एक ऐसे युवा शोधार्थी हैं, जिनमें ज्ञान की गहराई, साहित्य के प्रति समर्पण और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उनका जीवन संघर्ष, साधना और सफलता की एक प्रेरक गाथा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकती है। यह जानकारी कोलकाता से शिक्षाविद् विनोद यादव द्वारा अमर संदेश को दी गई।
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