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प्रवास में गूंजी पहाड़ की पुकार: ‘भेटो पहाड़ ट्रस्ट’ द्वारा नॉएडा में ‘झोड़ा झूमेलो कौथिग’ की धूम

उत्तराखंड की संस्कृति और अधिकारों के संरक्षण का संकल्प, ‘भेटो पहाड़ चैरिटेबल ट्रस्ट’ ने जुटाई प्रवासियों की भारी भीड़

Amar sandesh दिल्ली/नॉएडा (विशेष संवाददाता): राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में रह रहे प्रवासी उत्तराखंडियों के लिए रविवार का दिन अपनी मिट्टी की खुशबू और लोक परंपराओं से रूबरू होने का रहा। भेटो पहाड़ चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा सेक्टर-56 स्थित सामुदायिक भवन में आयोजित ‘झोड़ा झूमेलो कौथिग’ ने न केवल पहाड़ की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया, बल्कि मूल निवास, रिवर्स पलायन और सशक्त भू-कानून इत्यादि जैसे गंभीर मुद्दों पर भी मंथन किया।

विशिष्ट जनों की उपस्थिति और गौरवमयी अतिथि कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्री वी. के. तिवारी (चेयरमैन एवं संस्थापक, तिवारी आई सेंटर) और विशिष्ट अतिथि डॉ. के. सी. पांडेय (विश्व विख्यात जादूगर) द्वारा किया गया।

इस अवसर पर डॉ. के. सी. पांडेय आकर्षण का केंद्र रहे। गिनीज बुक और लिमका बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराने वाले डॉ. पांडेय, जिन्हें कुतुब मीनार को गायब करने वाले जादूगर के रूप में जाना जाता है, ने अपनी उपस्थिति एवं उत्कृष्ट जादुई प्रदर्शन द्वारा कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। वहीं, मुख्य अतिथि श्री तिवारी ने ट्रस्ट के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रवास में अपनी जड़ों को याद रखना ही सच्ची देशभक्ति है।

लोक विधाओं का जादू और सांस्कृतिक समागम

पहाड़ की पारंपरिक लोक विधाओं ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रसिद्ध लोक गायक भुवन रावत के गीतों पर प्रवासी जमकर थिरके। युवा प्रतिभाओं में गायक ऋषभ खंडूरी, नृत्याँगना अनुष्का सुंदरियाल, अपेक्षा डोबरियाल और पृषा नेगी ने शानदार प्रस्तुतियां दीं।

इस उत्सव में बच्चों के लिए ‘उत्तराखंड से जुड़े विषयों पर पेंटिंग और क्विज कम्पटीशन का भी आयोजन किया गया । उत्तराखंड परिवार के बच्चों ने इसमें बढ़-चढ़कर भाग लिया एवं प्राइज जीते।

विशेष आकर्षण विद्या रावत और भावना उप्रेती की झोड़ा नृत्य टीम रही, जिन्होंने पारंपरिक वेशभूषा में उत्तराखंड की सामूहिक लोक नृत्य परंपरा का ऐसा प्रदर्शन किया कि पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

भेटो पहाड़ चैरिटेबल ट्रस्ट’ मात्र एक सांस्कृतिक संगठन नहीं है, बल्कि यह दिल्ली-NCR में रह रहे राजपत्रित अधिकारियों और विशिष्ट जनों का एक ऐसा मंच है। यह ट्रस्ट समय-समय पर सामाजिक मुद्दों जैसा कि मूल निवास , रिवर्स पलायन और सशक्त भू-कानून इत्यादि तथा उत्तराखंड के आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों की आवश्यकता पडने पर मदद पर कार्य करता रहा है। कार्यक्रम के माध्यम से ट्रस्ट ने एक बार फिर संदेश दिया कि प्रवास में रहकर भी मूल निवास के उद्धार, वर्तमान में जंगली जानवरों के आतंक और रिवर्स पलायन की चिंता, पर्यत्न और समाधान का चिंतन करना प्रत्येक प्रवासी का कर्तव्य है।इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में ट्रस्ट के चेयरमैन जे. पी. कवटियाल और वाईस चेयरमैन किशोर चंद उपाध्याय के साथ एस. पी. गौड़, हरीश जुगरान, डी. एस. मेहरा, जी.डी.जोशी, रजनीश गौड़, दिनेश फुलारा, एस.पी.ममगाईं और आनंद पडालिया का विशेष योगदान रहा।

कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन में श्रीमती उपासना सुंदरियाल की भूमिका सराहनीय रही, जिन्होंने पिछले तीन महीनों के अथक परिश्रम से कलाकारों और प्रायोजकों को एक सूत्र में पिरोया। आयोजन का कुशल संचालन बी. सी. गौड़ और हरीश उपाध्याय के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

अंत में, यह आयोजन ‘प्रवासी उत्तराखंडियों के लिए, प्रवासी उत्तराखंडियों द्वारा’ के नारे को चरितार्थ करने में सफल रहा, जिसने प्रवासियों को अपनी संस्कृति और अधिकारों के प्रति नई ऊर्जा से भर दिया।

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