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नदी उत्सव: कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल में नदी संस्कृति और भारतीय परंपरा का संगम

-डॉ के सी पांडेय

कोलकाता, 2 फरवरी। सभ्यता और नदियों के अटूट संबंधों को जीवंत करने के उद्देश्य से, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के जनपद संपदा विभाग द्वारा ‘नदी उत्सव’ के उपलक्ष्य में दो दिवसीय विशेष सेमिनार और प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। 2 फरवरी, 2026 को कोलकाता के प्रतिष्ठित विक्टोरिया मेमोरियल हॉल में इस प्रदर्शनी का भव्य शुभारंभ हुआ। यह आयोजन विरासत आर्ट (Virasat Art) और विक्टोरिया मेमोरियल हॉल के साझा सहयोग से संपन्न हुआ।

नदी संस्कृति पर आधारित यह विशेष प्रदर्शनी 2 फरवरी से 11 फरवरी, 2026 तक आम जनता के लिए खुली रहेगी। कोलकाता के नागरिक और कला प्रेमी अगले दस दिनों तक नदियों के पौराणिक, ऐतिहासिक और आर्थिक महत्व को दर्शाती इन दुर्लभ कलाकृतियों का अवलोकन कर सकेंगे।

प्रदर्शनी में चित्रों, ओलियोग्राफ्स और कलाकृतियों के एक विविध संग्रह के माध्यम से भारतीय नदी संस्कृति की समृद्ध विरासत को बहुत ही अनूठे ढंग से दर्शाया गया है। इसमें विशेष रूप से जिन विषयों को प्रमुखता दी गई है वह है पौराणिक कथाएं-नदियों से जुड़ी प्राचीन मान्यताएं और गाथाएं,मंदिर परंपराएं -नदी तटों पर होने वाले धार्मिक अनुष्ठान और अनुष्ठानिक महत्व, सांस्कृतिक मानचित्रण -नदियों का हमारी पहचान और भूगोल पर प्रभाव, आर्थिक और सामाजिक विकास- नदियों द्वारा आजीविका के सृजन और राष्ट्र की प्रगति में उनके योगदान का चित्रण।

प्रदर्शनी का आधिकारिक उद्घाटन प्रख्यात विद्वान और पूर्व राज्यसभा सदस्य श्री स्वपन दास गुप्ता द्वारा किया गया। उद्घाटन समारोह के दौरान उन्होंने नदियों को भारतीय सभ्यता की जीवनरेखा बताते हुए इस पहल की सराहना की।

आयोजन की सफलता में श्री गणेश सिंह और उनकी टीम के अथक प्रयासों को भी सराहा गया, जिनकी सक्रिय पहल ने इस कार्यक्रम को भव्य रूप दिया। साथ ही, विक्टोरिया मेमोरियल हॉल के सचिव और क्यूरेटर श्री अनुराग कुमार व उनकी टीम के सहयोग की प्रशंसा की गई, जिन्होंने इस प्रदर्शनी के लिए आवश्यक स्थान और लॉजिस्टिक सहायता प्रदान कर इसे साकार किया।

इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य आगंतुकों को नदियों और भारत की सांस्कृतिक पहचान के बीच के गहरे संबंधों से अवगत कराना है। यह आयोजन न केवल कला प्रेमियों के लिए एक गंतव्य है, बल्कि यह आम जनमानस को नदी तटों की यात्राओं (यात्रा), मूर्त विरासत और नदियों के संरक्षण के प्रति चिंतन करने के लिए भी प्रेरित करता है।

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