बच्चे केवल लाभार्थी नहीं, राष्ट्र के भविष्य के निर्माता–राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
Amar sandesh नई दिल्ली। विद्यालयों में संचालित पौष्टिक भोजन कार्यक्रम का सकारात्मक प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। इस पहल के परिणामस्वरूप बच्चों के विद्यालयों में नामांकन, नियमित उपस्थिति और स्कूल में बने रहने की दर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता तथा शैक्षणिक प्रदर्शन में भी सार्थक सुधार देखने को मिला है।
इस संदर्भ में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अक्षय पात्र फाउंडेशन ‘समग्र शिक्षा अभियान’ के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह अभियान वर्ष 2030 तक देश के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराने के लक्ष्य के साथ संचालित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि विद्यालयों में चल रहा यह पोषण कार्यक्रम केवल भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों के सर्वांगीण विकास की मजबूत आधारशिला भी बन रहा है। पौष्टिक आहार मिलने से बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर हो रहा है, जिससे वे पढ़ाई में अधिक ध्यान लगा पा रहे हैं और विद्यालयी गतिविधियों में सक्रिय रूप से भागीदारी कर रहे हैं।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि बच्चे केवल निःशुल्क भोजन कार्यक्रम के लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि वे देश के उज्ज्वल भविष्य के निर्माता हैं। आज उन्हें जो पौष्टिक भोजन मिल रहा है, वह वास्तव में राष्ट्र की मानव पूंजी में किया गया महत्वपूर्ण निवेश है।
उन्होंने कहा कि स्वस्थ, शिक्षित और ऊर्जावान बच्चे ही भविष्य में भारत के सशक्त कार्यबल का निर्माण करेंगे। यही पीढ़ी वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा और पोषण के इस समन्वित प्रयास से न केवल विद्यालयों की स्थिति सुदृढ़ होगी, बल्कि आने वाले वर्षों में देश की सामाजिक और आर्थिक प्रगति को भी नई गति मिलेगी।