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अमर चंद्र
दिल्ली।उत्तराखंड की समृद्ध लोक-संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकता को सहेजने के उद्देश्य से उत्तराखंड कुमाऊं समाज सेवा समिति (पंजी.) द्वारा गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर 11वां वार्षिक उत्तराखंडी सांस्कृतिक महोत्सव “उतरणी कौतिक” का भव्य आयोजन किया जा रहा है।
यह जानकारी अमर संदेश को समिति के अध्यक्ष हरीश साह द्वारा दी गई।।यह सांस्कृतिक आयोजन 26 जनवरी 2026 (सोमवार) को रामवाटिका पार्क, सेक्टर–2, वैशाली, गाजियाबाद में आयोजित होगा। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 9:00 बजे मां नंदा–सुनंदा डोली एवं शोभा यात्रा से किया जाएगा, जबकि मुख्य सांस्कृतिक कार्यक्रम दोपहर 1:00 बजे से रात्रि 10: बजे तक चलेगा।
उन्होंने बताया कि इस आयोजन को सफल बनाने में समिति की पूरी कार्यकारिणी सक्रिय भूमिका निभा रही है। समिति के प्रमुख पदाधिकारियों में अध्यक्ष हरीश साह, उपाध्यक्ष गोपाल नाथ गोसाईं,भी डी सनवाल,महासचिव जगदीश पटवाल, सचिव जगत भाकुनी, नरेंद्र पटवाल, कोषाध्यक्ष लोकेश भट्ट, सह-कोषाध्यक्ष मनोज कार्की, सांस्कृतिक सचिव भैरव भाकुनी,प्रताप घुघतियाल,प्रचार-प्रसार सचिव प्रकाश बिष्ट (रंगीलो) सहित अन्य पदाधिकारी शामिल हैं।
समिति को वरिष्ठ समाजसेवियों का मार्गदर्शन भी प्राप्त हो रहा है। समिति के सलाहकार मंडल में रमेश रावत, नवीन जोशी, प्रदीप राजगुरु, प्रकाश चंद्र पांडे, सुनील दत्त शर्मा और जगत नेगी शामिल हैं, जबकि मुख्य सलाहकारों के रूप में हेम बिष्ट, हीरा नेगी, विक्रम देव, मोहन सिंह रावत, रघुवीर रावत और मदन बिष्ट समिति को दिशा प्रदान कर रहे हैं।
इस आयोजन में विशेष सहयोग देने वालों में गिरीश जोशी, राजेंद्र बिष्ट एवं केवल खोलिया का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिनके सहयोग से यह सांस्कृतिक महोत्सव और अधिक भव्य रूप ले सका है।
श्री हरीश साह ने बताया कि कार्यक्रम में उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोक कलाकार किशन महिपाल, पप्पू गुसाईं, भगवत मनराल, यशना जोशी, किशोर कबड़वाल, मनोज आर्य और माया उपाध्याय अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से उत्तराखंडी लोकगीत, झोड़ा-छपेली, जागर और पारंपरिक संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत करेंगे।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड कुमाऊं समाज सेवा समिति विगत 11 वर्षों से उत्तराखंडी संस्कृति, बोली-भाषा और परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भी निरंतर कार्य कर रही है।
समिति अध्यक्ष ने दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में निवास कर रहे समस्त उत्तराखंडी समाज एवं अन्य नागरिकों से अपील की कि वे परिवार सहित इस सांस्कृतिक आयोजन में शामिल होकर कार्यक्रम को सफल बनाएं।
“उतरणी कौतिक केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उत्तराखंडी समाज की पहचान, एकता और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव है।
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