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जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल: भारतीय चिंतन, विज्ञान और राष्ट्रीय पहचान पर संवाद

Amar sandesh दिल्ली/जयपुर । आज जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) 2026 के चारबाग प्रांगण में डॉ. आदित्य नाग ने अतिथि के रूप में सहभागिता की। इस अवसर पर प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक एवं वरिष्ठ विचारक श्री जे. नंदकुमार की पुस्तक “National Selfhood in Science” पर एक विचारोत्तेजक एवं सारगर्भित खुली चर्चा आयोजित की गई। यह सत्र भारतीय ज्ञान परंपरा, वैज्ञानिक चिंतन तथा राष्ट्रीय आत्मबोध के ऐतिहासिक एवं बौद्धिक पक्षों पर केंद्रित रहा।

चर्चा में इस तथ्य को प्रमुखता से रेखांकित किया गया कि भारत में वैज्ञानिक प्रगति की परंपरा केवल औपनिवेशिक काल तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसकी जड़ें भारत की प्राचीन एवं समृद्ध सभ्यता में गहराई से निहित हैं। सत्र ने इस धारणा को प्रभावी रूप से चुनौती दी कि आधुनिक विज्ञान का विकास भारत में केवल ब्रिटिश शासन के दौरान ही प्रारंभ हुआ।

इस संवाद का नेतृत्व श्री जे. नंदकुमार एवं प्रख्यात शिक्षाविद् प्रो. मकरंद आर. परांजपे ने किया। सत्र का आयोजन 19 जनवरी 2026 को दोपहर 3:00 बजे से 3:50 बजे तक इतिहास | गैर-कथा (Non-Fiction) श्रेणी के अंतर्गत सत्र संख्या 257 के रूप में “भारतीय चिंतन: वैज्ञानिक प्रयास और राष्ट्रीय पहचान” शीर्षक से चारबाग प्रांगण, जेएलएफ में संपन्न हुआ।

इसके अतिरिक्त, आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक श्री जे. नंदकुमार के साथ एक औपचारिक बैठक भी आयोजित हुई, जिसमें आगामी समय में वैचारिक, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन को लेकर आपसी सहमति बनी। यह सत्र भारतीय ज्ञान परंपरा को समकालीन संदर्भों में समझने और आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैचारिक पहल सिद्ध हुआ।

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