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ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत ने रचा नया इतिहास चार्जिंग स्टेशन, गैस ग्रिड, जैव ईंधन और स्वच्छ परिवहन में अभूतपूर्व प्रगति

Amar sandesh नई दिल्ली | भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने वर्ष 2025 के दौरान ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक नीतिगत सुधारों, बुनियादी ढांचे के सशक्तिकरण और स्वच्छ ऊर्जा पहलों के माध्यम से देश को आत्मनिर्भर और टिकाऊ ऊर्जा भविष्य की ओर निर्णायक रूप से आगे बढ़ाया है।

इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए देशभर में दुकानों पर 8,932 ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने अपने संसाधनों से 18,500 से अधिक चार्जिंग स्टेशन विकसित किए हैं। वहीं, ‘अपना घर’ पहल के अंतर्गत 500 से अधिक ट्रक चालकों के लिए सड़क किनारे सुविधाओं के निर्माण से सड़क सुरक्षा में सुधार के साथ-साथ ग्रामीण रोजगार को भी बढ़ावा मिला है।

ऊर्जा अवसंरचना को बहु-ईंधन मॉडल की ओर ले जाते हुए, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां वर्ष 2024-25 से 2028-29 के बीच देश के प्रमुख मार्गों पर 4,000 एकीकृत ऊर्जा स्टेशन स्थापित कर रही हैं। ये स्टेशन पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ जैव ईंधन, सीएनजी, एलएनजी और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग जैसी सुविधाएं प्रदान करेंगे। 1 नवंबर 2025 तक 1,064 ऊर्जा स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं।

गैस आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हुए, देश में परिचालनशील प्राकृतिक गैस पाइपलाइनों की लंबाई 2014 में 15,340 किमी से बढ़कर जून 2025 तक 25,429 किमी हो गई है, जबकि 10,459 किमी पाइपलाइन निर्माणाधीन हैं। पीएनजीआरबी और सरकार द्वारा अधिकृत इन परियोजनाओं के पूरा होने से राष्ट्रीय गैस ग्रिड का सपना साकार हो रहा है, जिससे संतुलित आर्थिक और सामाजिक विकास को गति मिलेगी।

क्षेत्रीय असमानताओं को समाप्त करने के उद्देश्य से “एक राष्ट्र, एक ग्रिड, एक टैरिफ” मिशन के तहत एकीकृत पाइपलाइन टैरिफ व्यवस्था लागू की गई है, जो 1 अप्रैल 2023 से प्रभावी है। वर्तमान में देश की लगभग 90 प्रतिशत परिचालन गैस पाइपलाइनें इस व्यवस्था के अंतर्गत आ चुकी हैं, जिससे प्राकृतिक गैस की उपलब्धता और सामर्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

शहरी गैस वितरण नेटवर्क का विस्तार अब 307 भौगोलिक क्षेत्रों तक हो चुका है। सितंबर 2025 तक पीएनजी घरेलू कनेक्शन 1.57 करोड़ तक पहुंच गए हैं और सीएनजी स्टेशनों की संख्या 8,400 से अधिक हो गई है। संशोधित गैस आवंटन दिशानिर्देशों से उपभोक्ताओं को मूल्य अस्थिरता से सुरक्षा मिली है।

स्वच्छ और किफायती परिवहन को बढ़ावा देने के लिए संपीड़ित जैव गैस (सीबीजी) क्षेत्र में तेज़ी आई है। 1 नवंबर 2025 तक 130 से अधिक सीबीजी संयंत्र चालू हो चुके हैं और कई निर्माणाधीन हैं। वित्त वर्ष 2025-26 से सीएनजी और पीएनजी में सीबीजी मिश्रण अनिवार्य कर दिया गया है।

जैव ईंधन क्षेत्र में भी ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2024-25 की शुरुआत में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण 19.24 प्रतिशत तक पहुंच गया, जिससे 1.55 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचत और कार्बन उत्सर्जन में बड़ी कमी आई। प्रधानमंत्री जी-वन योजना के तहत पानीपत और नुमालीगढ़ में चालू द्वितीय पीढ़ी (2G) इथेनॉल संयंत्रों ने उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है।

सतत विमानन ईंधन (SAF) के क्षेत्र में भी भारत ने ठोस कदम बढ़ाए हैं। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए वर्ष 2027, 2028 और 2030 से क्रमशः 1%, 2% और 5% SAF मिश्रण के सांकेतिक लक्ष्य निर्धारित किए हैं। इस दिशा में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) पानीपत रिफाइनरी में SAF उत्पादन के लिए ISCC CORSIA प्रमाणन प्राप्त करने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी है। इसके साथ ही IOCL और एयर इंडिया के बीच SAF आपूर्ति हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

अपस्ट्रीम क्षेत्र में तेल क्षेत्र (विनियमन एवं विकास) संशोधन अधिनियम, 2025 और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियम, 2025 के लागू होने से बड़े सुधार हुए हैं। हाइड्रोकार्बन अन्वेषण लाइसेंसिंग नीति के तहत 3.78 लाख वर्ग किमी क्षेत्र में फैले 172 ब्लॉक आवंटित किए गए, जिससे 4.36 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश आकर्षित हुआ है।

रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के विस्तार, अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और विदेशी निवेशों के माध्यम से भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ किया है।

नीतिगत सुधारों, बुनियादी ढांचे के विस्तार और स्वच्छ ऊर्जा पहलों के माध्यम से वर्ष 2025 में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ऊर्जा तक पहुँच, सामर्थ्य, स्थिरता और सुरक्षा को मजबूत करते हुए भारत को एक लचीले, आत्मनिर्भर और समावेशी ऊर्जा भविष्य की ओर अग्रसर किया है।

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