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33वां उमेश डोभाल स्मृति समारोह 2026 का भव्य आयोजन अल्मोड़ा में सम्पन्न 

सी एम पपनैं

अल्मोड़ा (उत्तराखंड)। उमेश डोभाल स्मृति ट्रस्ट द्वारा 24 और 25 मार्च को अल्मोड़ा स्थित जिला पंचायत सभागार में अल्मोड़ा जिला पत्रकारों द्वारा गठित आयोजन समिति के सानिध्य में उमेश डोभाल स्मृति सम्मान का प्रभावशाली व यादगार आयोजन ट्रस्ट अध्यक्ष देश के वरिष्ठ पत्रकार गोबिंद पंत राजू की अध्यक्षता तथा उत्तराखंड के विभिन्न शहरों और कस्बों से तथा उत्तर प्रदेश और दिल्ली से बड़ी संख्या में पहुंचे पत्रकारों, साहित्यकारों, रंगकर्मियों व सामाजिक संगठनों की प्रभावी उपस्थित में आयोजित किया गया।

24 मार्च को प्रातः 11.30 बजे अल्मोड़ा के गांधी पार्क से जिला पंचायत सभागार तक राज्य व राष्ट्रीय स्तर के पत्रकारों के सानिध्य में स्थानीय पत्रकारों, लेखकों, रंगकर्मियों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े प्रबुद्ध जनों द्वारा समारोह स्थल तक जन जागरूकता जुलूस निकाल, आयोजन का श्रीगणेश किया गया। आयोजित जुलूस में जन गीतों का बोलबाला तथा ‘उमेश डोभाल एक नाम नहीं, एक धारा थी, एक धारा है’ नारा गुंजायमान किया गया।

आयोजित अति प्रभावशाली जागरूकता जूलूस में अल्मोड़ा के मुख्य मार्गों में जो सामूहिक जन जागरूकता गीत गाए गए उनके बोल थे- 

1- उत्तराखंड मेरी मातृभूमि… पितृ भूमि…। 

2- ओ जैता एक दिन तो आलो ऊ दिन दुनी में…।

3- हम लड़ते रया दाज्यू, हम लड़ते रौलो…।

4- लस्का कमर बांधा, हिम्मत का साथा…।

5- न फस न फस कदम कदम… हमें जवाब चाहिए…।

आयोजित सामूहिक जूलूस के बाद जिला पंचायत सभागार में मंचासीन गोबिंद पंत ‘राजू’, पी सी तिवारी, बल्ली सिंह चीमा, चारु तिवारी, राजीव लोचन साह, सुरेश नौटियाल तथा अल्मोड़ा प्रेस क्लब अध्यक्ष जगदीश जोशी के साथ-साथ अन्य पत्रकारों में प्रमुख प्रकाश पंत, मुकुल कुमार, ईश्वर दत्त जोशी, विमल भारती, डॉ. निर्मल जोशी, आनंद सिंह राणा, कपिल मल्होत्रा द्वारा आयोजित प्रथम सत्र में उत्तराखंड राज्य गठन के विगत पच्चीस वर्षों के क्रियाकलापों, स्वतंत्रता संग्राम, साहित्य व पत्रकारिता में अल्मोड़ा के प्रबुद्ध जनों के योगदान, उत्तराखंड में हुए मजदूर आंदोलन व लागू श्रम कानून, राज्य के जल, जंगल, जमीन, वन पंचायत, राज्य पुलिस की पत्रकारों के साथ दरिंदगी, खेती-किसानी इत्यादि इत्यादि पर बेबाक विचार व्यक्त किए गए।

वक्ताओं द्वारा कहा गया, जैसा राज्य और पत्रकारिता उत्तराखंड का जन चाहता था वैसा नहीं हो रहा है। ऐसा क्या हुआ जिस अंचल को एक बेहतर बनाया जा सकता था नहीं बन पाया है। लगता था नए राज्य गठन के बाद नौकर शाही कम होगी, जन की भागीदारी होगी। ऐसा नहीं हुआ, कौन जिम्मेवार है? कहा गया, जिम्मेवारी दूसरों पर डाली जाती है। गंभीरता से विचार विमर्श करना जरूरी है। अंचल की खेती किसानी समाप्त हो गई है। गांव भुतहा हो गए हैं। 

वक्ताओं द्वारा कहा गया, उमेश डोभाल खाली पत्रकार नहीं थे, गलत पर समझौता नहीं करते थे। उत्तराखंड में बुद्धिजीवियो का बड़ा तबका है उन्हें अंचल के उद्धार हेतु आगे आना चाहिए।

वक्ताओं द्वारा स्वतंत्रता आंदोलन, साहित्य व पत्रकारिता में अल्मोड़ा के लोगों की प्रमुखता से निभाई गई भूमिका पर सारगर्भित प्रकाश डाला गया। कहा गया, अनेकों प्रेरणा जनक लोगों द्वारा समाज को संगठित करने का कार्य किया गया। उनके द्वारा संचालित अखबारों ने पत्रकारिता का सच्चा धर्म निभाया। 

अंचल के युवाओं की बड़ी संख्या में बेरोजगारी पर वक्ताओं द्वारा अवगत कराया गया, राज्य गठन से पूर्व ही अंचल में स्थापित अनेकों कल-कारखाने पलायन कर गए थे। राज्य गठन के बाद सिडकुल बना, लगा अंचल के युवाओं को रोजगार मिलेगा। हालत खराब है। श्रम कानून बदल दिए गए हैं। नौकरियां ठेकेदारी पर चली गई है। काम ज्यादा लिया जा रहा है। न्यूनतम वेतन भी नहीं मिल रहा है। 

वक्ता पत्रकारों द्वारा कहा गया, अंग्रेजों से लड़ कर पंचायतों को जो हक मिला था, नए राज्य गठन के बाद वे हक छीन लिए गए हैं। खेती किसानी हो नहीं रही है, किसान निधि बढ़ती जा रही है। किसान की कोई परिभाषा अंचल में नहीं है। दस नाली से कम जमीन वाला भूमिहीन कहलाया जाता है जिनका अंचल में बड़ा प्रतिशत है।

अंचल के मैदानी क्षेत्र में पुलिसकर्मियों की पत्रकारों के साथ बदसलुकी की गाथा ने सभागार में उपस्थित सभी पत्रकारों में रोष उत्पन्न किया, की गई बदसलुकी की निंदा की गई। प्रस्ताव पास कर संबंधित उच्च अधिकारियों व सत्ता में बैठे शीर्ष नेताओं को कोर्ट के आदेश के मुताबिक की गई हरकतों पर लगाम लगाने व संबंधित अधिकारियों के खिलाफ त्वरित कार्यवाही की मांग की गई। 

पत्रकार वक्ताओं द्वारा बेबाक होकर व्यक्त किया, अंचल के जन की सभी ताकतों को जंजीर में जकड़ा जा चुका है। कुछ सिरफिरों को ताकत देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है। कहा गया, जन को अपना प्रतिनिधि चुनने का अधिकार तो है, चुने हुए को वापस बुलाने का अधिकार नहीं है। कहा गया, वर्तमान समस्याएं राजनैतिक हैं, राजनैतिक तौर पर ही उनका समाधान खोजा जा सकता है।

पत्रकार वक्ताओं द्वारा कहा गया, अल्मोड़ा में काफी लंबे अंतराल के बाद एक सभा देखने को मिल रही है। कहा गया, अनौपचारिक रूप से हमें जनसरोकारों हेतु खूब विचार विमर्श करना चाहिए। अल्मोड़ा के पत्रकार व प्रबुद्ध जन वक्त निकाले आपसी विचार विमर्श करें। जन की भावनाओं को मजबूत करे उन्हें बल दें। कहा गया, खेती-किसानी पर देश की लड़ाई किसान ही लड़ रहा है। ओने पौने दामों में कृषक से कृषि उत्पाद खरीद बिचौलियों द्वारा महंगे दामों में बेचे जा रहे हैं। 

पत्रकार वक्ताओं द्वारा कहा गया, उमेश डोभाल ट्रस्ट से जुड़े लोग घंटी बजाने का कार्य करते हैं। उमेश डोभाल की जो वैचारिकता थी, मूल रूप से लड़ाई शराब के खिलाफ थी, वही लड़ाई आज सरकार के खिलाफ है जो शराब को बढ़ावा दे रही है। 

अल्मोड़ा के वरिष्ठ पत्रकारों द्वारा अवगत कराया गया उनकी मान्यता खत्म कर दी गई है, सरकार की उक्त नीति का विरोध किया गया, निंदा की गई। मान्यता बहाल करने की मांग पर जोर दिया गया। उक्त सत्र के दौरान विगत दिनों अल्मोड़ा खत्याड़ी गांव निवासी सु-विख्यात लोकगायक स्व. दिवान कनवाल के निधन पर सभागार में उपस्थित पत्रकारों व अन्य उपस्थित जनों द्वारा दो मिनट का मौन रख मृत आत्मा की शांति हेतु प्रार्थना की गई, श्रद्धांजलि अर्पित की गई। 

दिन के दूसरे सत्र सवाल-जवाब के अंतर्गत सभागार में उपस्थित अनेक आंचलिक पत्रकारों द्वारा पत्रकारिता से संबंधित विभिन्न आयामों में आ रही दुविधाओं व समस्याओं पर अपने विचार बेबाक होकर रखे गए। पहले दिन के दूसरे सत्र की समाप्ति से पूर्व विहान सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था अल्मोड़ा द्वारा संस्था संयोजक देवेंद्र भट्ट के सानिध्य में पत्रकारों के मनोरंजन हेतु अंचल के सुप्रसिद्ध नंदा देवी डोले के साथ गीत, संगीत तथा नृत्य का मनभावन कार्यक्रम मंचित किया गया। आयोजित दोनों सत्रों का प्रभावशाली मंच संचालन चंद्र शेखर द्विवेदी तथा विभु कृष्णन द्वारा बखूबी किया गया।

25 मार्च को आयोजित पहले सत्र का श्रीगणेश बिडाई वादक भास्कर द्वारा प्रस्तुत लोक धुनों से तथा पत्रकारों में प्रमुख नवीन बिष्ट, ओ पी पांडे, रमेश पांडे ‘कृषक’, नरेश ढौंढियाल, डॉ. हयात रावत, चंद्र मोहन पपनै तथा दया शंकर टम्टा को मंचासीन कर किया गया। आयोजित सत्र में मंचासीनों के साथ-साथ राष्ट्रीय जल सम्मान प्राप्त मोहन कांडपाल, दिनेश उपाध्याय, कुंडल चौहान, जगमोहन रौतेला, शंकर सिंह, रमेश जी, सूरज कुकरेती, शालिनी तथा प्रभात ध्यानी द्वारा अंचल के पर्यावरण, जल श्रोतों, जन पक्षधर पत्रकारिता, स्वास्थ, शिक्षा, पत्रकारों की दशा, आंचलिक विकास, खेती-किसानी इत्यादि इत्यादि जैसे ज्वलंत विषयों पर विचार व्यक्त किए गए।

पत्रकार वक्ताओं द्वारा कहा गया, ग्रामीण क्षेत्रों में जिन नौलों में पानी था वह सूख गया है। ‘पानी बोओ, पानी उगाओ’ के नारे के साथ बांज के पेड़ लगा व खाव (गड्ढे) खोद जल श्रोतों का पुनरुद्धार किया जाना चाहिए। उक्त विधि द्वारा कार्य कर अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में सफलता भी देखने को मिली है। कहा गया, गंगा की प्रथम इकाई नौला है। कहा गया, अनभिज्ञ लोगों से अंचल की योजनाएं बनवाई व क्रियान्वित की जा रही हैं जो अंचल का बिगाड़ा कर रही हैं। ग्रामीण क्षेत्र के बुजुर्गों व स्थानीय अनुभवी लोगों से विचार विमर्श कर अंचल के दीर्घ हित में योजनाएं क्रियान्वित की जानी चाहिए। 

पत्रकार वक्ताओं द्वारा कहा गया, जनपक्षधर पत्रकारिता कमजोर हो चुकी है। पत्रकारों को एक सूत्र में बांधने की कमजोरी सामने आ रही है। पत्रकारों के समक्ष आजीविका का सवाल भी खड़ा हो गया है। कहा गया, अंचल में बड़ी-बड़ी बिल्डिंगे व मॉल बन गए हैं लेकिन अस्पताल नहीं बने। मरीजों को रैफर किया जाता है। हाई सेंटर क्या है पता नहीं। जो विशेषज्ञ डॉक्टर रखे जा रहे हैं उन्हें अस्थाई तौर पर रखा जा रहा है। प्राइवेट स्कूल और अस्पताल खूब खुल रहे हैं उनका उद्घाटन मंत्रीगण कर रहे हैं। दीर्घकालीन सरकारी योजनाएं नहीं बन रही हैं। पत्रकार संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों व नेताओं से सवाल जवाब नहीं कर पा रहे हैं। मुख्यधारा के पत्रकारों की रिपोर्टिंग को जन के बीच जाने से रोका जाता है, नकारा जाता है। सोशल मीडिया के पत्रकार ही स्वतंत्र हैं। 

पत्रकार वक्ताओं द्वारा कहा गया, अंचल से हो रहे पलायन पर अंकुश लगा खेती को बचाना जरूरी है। नए राज्य का गठन नहीं होता तो अच्छा था, उत्तर प्रदेश में अच्छा था। कहा गया, पत्रकारिता के माध्यम से लोगों को जागरूक करना अति आवश्यक है। नशे को रोकना होगा, अंचल की युवा पीढ़ी नशे का सेवन कर बर्बाद हो रही है। कहा गया, उम्मीदें आगे बढ़ाती हैं, जो कहा जा रहा है उस पर काम किया जाना चाहिए। युवाओं की भागीदारी बढ़ानी होगी, बेरोजगारी से निराशा की जद में पहुंच चुके युवाओं को प्रोत्साहन देना अति आवश्यक है।

पत्रकार वक्ताओं द्वारा कहा गया, गाड़ियों, बिल्डिंगों व सड़कों की चहल पहल विकास नहीं है। बड़े सरकारी अस्पतालों के टैस्ट प्राइवेट में करवाए जा रहे हैं। राजनैतिक पार्टी से जुड़े कर्ता धरताओं की भर्ती सरकारी तौर पर हो रही है। सामाजिक, राजनैतिक व सांस्कृतिक क्षेत्र में कमियां आ रही हैं। व्यक्तिगत रूप से कार्य हो रहे हैं लेकिन उस रूप में नहीं जैसे राजनैतिक पार्टियों से जुड़े लोगों के हो रहे हैं।

 

कहा गया, खेती की जमीन सिकुड़ गई है। पंचायती व्यवस्था छीन ली गई है। पुलिस का आतंक व भय छाया रहता है। अंचल के संसाधनों की लूट मची हुई है। कहा गया, अंचल के पत्रकार अपनी एकता बना, पत्रकारिता का धर्म निभा उत्तराखंड को ऐसा राज्य बनाए जिस पर आमजन को गर्व हो। दूसरे दिन के पहले सत्र का समापन हर्ष काफर की व्यंग से ओतप्रोत कविताओ से हुआ। उक्त सत्र का प्रभावशाली मंच संचालन विजय वर्धन उप्रेती द्वारा किया गया। 

आयोजन के दूसरे अंतिम सत्र में मंचासीन राजीव लोचन साह, पी सी तिवारी, जहूर आलम, गोविंद पंत ‘राजू’, प्रोफेसर (डॉ) शेखर पाठक तथा ट्रस्ट पदाधिकारियों व सदस्यों के कर कमलों उमेश डोभाल ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित स्मारिका का विमोचन किया गया। मंचासीनों द्वारा उत्तराखंड की दशा और दिशा पर विचार प्रकट किए गए। 

उमेश डोभाल ट्रस्ट द्वारा वर्ष 2026 का उमेश डोभाल स्मृति सम्मान अंचल के सुप्रसिद्ध साहित्यकार कपिलेश भोज को उनकी साहित्यधर्मिता के लिए उनके समर्पण, प्रेरणादायक और अनुकरणीय कार्य हेतु प्रदान किया गया। राजेन्द्र रावत ‘राजू’ स्मृति जनसरोकार सम्मान पर्यावरण संवर्धन के प्रति समर्पित और “वृक्ष प्रेमी” के नाम से मशहूर किशन सिंह मलड़ा को प्रदान किया गया। गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ स्मृति जनकवि सम्मान’ सुप्रसिद्ध रंगकर्मी यमुना राम को उनकी जनपक्षीय नाटकों और जन गीत के लिए दिया गया। सोशल मीडिया सम्मान विजय सिंह रावत की अनुपस्थिति में प्रेम पंचोली द्वारा प्राप्त किया गया। प्रिंट मीडिया सम्मान राजू सजवान को तथा विशेष सम्मान से शंभू राणा (नैनीताल समाचार) को सम्मानित किया गया। सम्मानित हुए सभी सम्मानित जनों को शाल ओढ़ा कर, प्रशस्ति पत्र पढ़ कर व प्रदान कर, स्मृति चिन्ह व ग्यारह-ग्यारह हजार रुपयों के चैक प्रदान कर सम्मानित किया गया।

इंटर मीडिएट का मेधावी छात्र अनिरुद्ध ज्योति पुरस्कार पौड़ी जनपद सिरौली गांव के कितन राज को तथा ग्राम चम्याला की मोनिका पंवार को भुवनेश्वरी सम्मान से नवाजा गया। उक्त सम्मान के तहत मेधावी छात्रों का शाल ओढ़ा कर, प्रशस्ति पत्र व पच्चीस हजार रुपया प्रदान कर सम्मानित किया गया। ट्रस्ट पदाधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया वर्ष 2027 में उक्त मेधावी छात्र सम्मान अल्मोड़ा के छात्रों को प्रदान किया जायेगा। 

सम्मानित हुए कपिलेश भोज, यमुना राम, किशन सिंह मालडा द्वारा जनपक्षी पत्रकारिता, पर्यावरण व तंत्र के हो रहे हास पर तथा मंचासीन जहूर आलम व मुख्य समारोह आयोजन कर्ता पी सी तिवारी द्वारा जनपक्षीय पत्रकारिता को ठोस रूप देने तथा ‘बोल पहाड़ी हल्ला बोल’ जैसे नारों को गुंजायमान करने से काम नहीं चलने के तथ्य पर गंभीरता पूर्वक विचार व्यक्त किए गए। 

उमेश डोभाल ट्रस्ट आयोजन में मुख्य वक्ता प्रोफेसर (डॉ) शेखर पाठक द्वारा सभी सम्मानितों को बधाई देते हुए उत्तराखंड अंचल के विगत सौ वर्षों के इतिहास पर सारगर्भित प्रकाश डाला गया। प्रेरणा श्रोत रहे लोगों का नाम लेकर उनके द्वारा किए गए प्रभावी कार्यों का जिक्र किया गया। कहा गया उस कालखंड में अंचल की पत्रकारिता शक्तिशाली और धारदार थी। अल्मोड़ा से प्रकाशित हुए अखबारों का शेखर पाठक द्वारा विस्तार से वर्णन किया गया। संपादकों की भूमिका का जिक्र किया। कहा गया आज सौ सालों बाद विधानसभा के सत्र एक हफ्ता नहीं चलती, संवाद नहीं हो रहा है। कठिन दौर से गुजर रहे हैं। विगत पच्चीस साल बेमानी, विवशता व पराजय का रहा है। जिसमें स्थानीय जन की समस्याओं की बात नहीं हुई है। पच्चीस वर्षों की समीक्षा इस मंच से नहीं हो पाई है। अंचल में विकास हुआ खनन वालों, नेताओं व कुछ पत्रकारों का भी। कहा गया, आज नशा सिर्फ शराब और पुड़ियों का नहीं सत्ता का नशा है। अगला नशा संपत्ति और संपदा का है। आम जन इस बात को नहीं समझ सकता है। कहा गया, उत्तराखंड आंदोलन के समय हमारे सामाजिक आंदोलन का महत्व था। राज्य बन जाने के बाद सामाजिक आंदोलनो को बल मिलना बंद हुआ, उनकी स्वायत्तता समाप्त हुई है। राजनीति बेलगाम हो गई है। सामाजिक आंदोलनो के बारे में सोचना होगा। 

शेखर पाठक द्वारा कहा गया, आज भी मेरा देश मेरा समाज मरा नहीं है, लेकिन सामाजिक आंदोलनो के लिए सुगठित संगठन की आवश्यकता है। पक्ष और विपक्ष मजबूत है, स्थानीय लड़ाई इसमें दुर्बल पड़ जाती है। पहाड़ी ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क गई है लोगों को नीचे लाने के लिए। भीतर का आदमी जिंदा है तो पत्रकारिता जिंदा है। कहा गया, हमारे संसाधन हमारी पहचान है। विचारों में भिन्नता हो सकती है लेकिन बेसिक चीजों पर हममें एकरूपता होनी चाहिए। अंचल में जो हो रहा है, युवाओं के लिए चुनौती है। युवा पच्चीस प्रतिशत गुस्से में दिखता है अन्य पिच्छहतर प्रतिशत चुप रहता है। युवाओं का गुस्सा न होना, बेचैन न होना, अच्छा नहीं है।

उमेश डोभाल ट्रस्ट अध्यक्ष देश के वरिष्ठ पत्रकार गोबिंद पंत ‘राजू’ द्वारा कहा गया, ट्रस्ट की मसाल जलाए रखना है। उमेश डोभाल ने पत्रकारिता की जरूरतों को जनहित में जमाने की सोची थी, वह लोगों के लिए खड़ी थी अपने लोगों की आवाज उठाने के लिए। कहा गया, विगत पच्चीस वर्षों में बहुत कुछ बदला है, सकारात्मक रूप में नहीं। उत्तर प्रदेश विधान सभा में हमारे विधायक रिक्शा से आते जाते थे आज के विधायकों के आगे पीछे दासियों लग्जरी गाड़ियों का काफिला चलता है, पुलिस देखी जा सकती है। राज्य बनने के बाद सता पत्रकारिता के खिलाफ रही है। आज बड़े अखबारों में पत्रकार जर्नलिस्ट एक्ट 1955 के दायरे में नहीं रखे जा रहे हैं। उक्त एक्ट पर चर्चा जरूरी है। 

आयोजित आयोजन में पत्रकारों द्वारा सर्वसम्मति से अनेकों प्रस्ताव भी पास किए गए जिन्हें राज्य के संबंधित संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं और अधिकारियों को उचित कार्यवाही हेतु प्रेषित करने हेतु उमेश डोभाल ट्रस्ट पदाधिकारियों द्वारा भेजे जाएंगे। सर्वसम्मति से पास प्रस्तावों में अंकिता भंडारी हत्याकांड पर उत्तराखंड के अस्तित्व और सम्मान के सवाल को देखते हुए वीआईपी को जांच के लिए बुलाने तथा उच्च न्यायालय के जज की देखरेख में उचित कार्यवाही करने। अंचल की नदियों से हो रहे अनियंत्रित खनन पर रोक लगाने, बदहाली के पड़ाव पर खड़ी अंचल की शिक्षा व स्वास्थ सेवाओं पर विशेष ध्यान देने, धार्मिक संस्थाओं के विषय पर तथा नजूल भूमि पर निवासरत लोगों के हित में कार्य करने, अंचल की पुलिस द्वारा पत्रकारों को प्रताड़ित करने की नापाक कोशिश पर लगाम लगाने इत्यादि इत्यादि प्रस्ताव मुख्य रहे। 

उमेश डोभाल ट्रस्ट हर साल प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कार्यक्रम आयोजित करती है। कार्यक्रम में पत्रकारिता अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए पुरस्कार दिए जाते रहे हैं। अल्मोड़ा में आयोजित आयोजन में अंचल के वरिष्ठ पत्रकार डॉ. हयात सिंह रावत, प्रकाश पांडेय, डॉ. निर्मल जोशी, राजेंद्र रावत, सी एस द्विवेदी, प्रेस क्लब उपाध्यक्ष कमलेश कनवाल, सचिव अशोक पांडे, उप सचिव कपिल मल्होत्रा, मोहित अधिकारी, किशन जोशी, हरीश भंडारी, हिमांशु लटवाल, दयाकृष्ण कांडपाल, नसीम अहमद, रमेश जोशी इत्यादि इत्यादि के द्वारा दिए गए योगदान पर ट्रस्ट अध्यक्ष गोबिंद पंत ‘राजू’ द्वारा आभार प्रकट किया गया। आयोजन में उपस्थित रहे अंचल व अन्य राज्यों के पत्रकारों व अन्य सभी जनों के प्रति आभार प्रकट कर आयोजन समाप्ति की घोषणा की गई। 

               

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