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सिलीगुड़ी साहित्य महोत्सव-2026 में विचारों का संगम: तकनीक, नैतिकता और मानविकी पर गहन मंथन

सिलीगुड़ी। सिलीगुड़ी साहित्यिक संस्था द्वारा आयोजित ‘सिलीगुड़ी साहित्य महोत्सव-2026’ विचारों, साहित्य और संस्कृति का अद्भुत संगम बनकर उभरा। इस प्रतिष्ठित आयोजन में पश्चिम बंगाल हिंदी विश्वविद्यालय की माननीय कुलपति प्रोफेसर नंदिनी साहू ने विशिष्ट आमंत्रित वक्ता के रूप में अपने विचार प्रस्तुत किए और समकालीन चुनौतियों पर गहन विमर्श किया।

 इस अवसर पर अपने प्रभावशाली संबोधन में प्रोफेसर साहू ने तकनीक, नैतिकता और मानविकी के अंतर्संबंधों पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान दौर की जटिलताओं को रेखांकित किया। उन्होंने विशेष रूप से युवा शोधकर्ताओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति सजग रहने की आवश्यकता पर बल दिया। ‘डिजिटल मानविकी’ और ‘उत्तर-सत्य’ के युग में ज्ञान की शुद्धता तथा शैक्षणिक ईमानदारी बनाए रखना समय की बड़ी चुनौती है इस पर उन्होंने गंभीर चिंता व्यक्त की।

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं की समानता, समकालीन साहित्य की दिशा और समाज में उसकी भूमिका पर भी सार्थक चर्चा हुई। महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता इसकी समावेशी सोच रही, जिसमें विभिन्न भाषाओं, पीढ़ियों और क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों को अपनी अभिव्यक्ति का समान अवसर मिला।

बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया और यह संदेश दिया कि साहित्य एवं संस्कृति के प्रति जुड़ाव बचपन से ही विकसित किया जाना चाहिए। इस अवसर पर प्रख्यात विदुषी संयुक्ता दासगुप्ता ने प्रोफेसर साहू को सम्मानित किया। साथ ही, प्रोफेसर साहू ने अपना कविता संग्रह ‘मेडूसा’ महोत्सव के आयोजक सुब्रत दत्ता को भेंट किया, जिसकी सराहना उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने की।

भारत की भाषाई विविधता की झलक भी इस महोत्सव में देखने को मिली, जहाँ आठ भाषाओं का प्रतिनिधित्व हुआ। विशेष रूप से विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी ‘टोटो’ भाषा ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। प्रोफेसर साहू ने इस भाषा पर भविष्य में शोध करने की इच्छा व्यक्त की।

इस सफल आयोजन के लिए आयोजक सुब्रत दत्ता एवं डॉ. सुदीप्तो चटर्जी बधाई के पात्र हैं, जिन्होंने विद्वत्ता, रचनात्मकता और सामाजिक सरोकारों को एक मंच पर लाने का सराहनीय कार्य किया। कार्यक्रम के समापन पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया गया।।

लेखक- डॉ. रेखा कुमारी त्रिपाठी

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