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100 वर्ष पुरानी गढ़वाल हितैषिणी सभा की सराहनीय पहल, वरिष्ठ सदस्य के घर पहुंचकर किया सम्मान

गढ़वाल हितैषिणी सभा पहुंची अपने वरिष्ठ सदस्यों के द्वार: हमारे बुजुर्ग हमारी शान

Amar sandesh नई दिल्ली। दिल्ली स्थित उत्तराखंड गढ़वाल समाज की लगभग 100 वर्ष पुरानी प्रतिष्ठित संस्था गढ़वाल हितैषिणी सभा ने वरिष्ठ सदस्यों के सम्मान और उनकी कुशलक्षेम जानने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया। इसी क्रम में रविवार, 22 मार्च 2026 को दोपहर साढ़े बारह बजे सभा के पदाधिकारियों ने मयूर विहार फेज-2 स्थित आवास पर पहुंचकर 93 वर्षीय वरिष्ठ सदस्य एवं पूर्व पदाधिकारी, पूर्व सीबीआई निरीक्षक महिताब सिंह रावत का अभिनंदन किया।

सभा की ओर से उन्हें “श्रीदेव सुमन वरिष्ठ सदस्य सम्मान” से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उनकी धर्मपत्नी देवश्वरी रावत, आयकर अधिकारी पुत्र राजेश सिंह रावत तथा पौत्र कार्तिकेय रावत उपस्थित रहे।

इस दौरान महिताब सिंह रावत ने सभा में अपने कार्यकाल के अनुभव साझा किए। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1993 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव द्वारा सीबीआई में उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था। उन्होंने सभा द्वारा वरिष्ठ सदस्यों के घर जाकर उनका हालचाल लेने और सम्मानित करने की पहल को सराहनीय बताया तथा विशेष प्रसन्नता व्यक्त की।

आयकर अधिकारी राजेश सिंह रावत ने कहा कि यह उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है कि जिस संस्था को उनके पिता ने अपना अमूल्य समय दिया, वही संस्था आज उनके योगदान का सम्मान कर रही है।

सभा के उपाध्यक्ष अधिवक्ता शैलेन्द्र सिंह नेगी, महासचिव पवन कुमार मैठानी, कोषाध्यक्ष धीरेन्द्र सिंह रावत, कार्यकारिणी सदस्य जगत सिंह असवाल, बालम सिंह बिष्ट, दिनेश डोभाल, सुरेन्द्र सिंह रावत एवं विकास चमोली विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुष्पमाला, उत्तराखंडी टोपी, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया।

इस अवसर पर कार्यकारिणी सदस्य विकास चमोली ने कहा कि संस्था का यह प्रयास केवल सम्मान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नई पीढ़ी को अपने बुजुर्गों के अनुभव और योगदान के प्रति संवेदनशील बनाने की एक सशक्त पहल है।

महिताब सिंह रावत का परिवार भी सामाजिक रूप से सक्रिय है। उनके दोनों पुत्र जितेन्द्र सिंह रावत और राजेश सिंह रावत सभा के सदस्य हैं, जबकि परिवार में तीन विवाहित बेटियां और तीन पौत्र भी हैं।

सभा की यह पहल समाज में वरिष्ठों के सम्मान और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम मानी जा रही है।

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