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संघ यात्रा के 100 वर्ष : वैचारिक चेतना और राष्ट्रबोध पर केंद्रित रहा ‘चेतना’ का सेमिनार–75.0

नई दिल्ली।चेतना एवं एस. आर. चेरिटेबल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित लाला सीताराम गोयल स्मृति सेमिनार–75.0 का भव्य आयोजन रविवार को रोहिणी स्थित एक होटल में गरिमामय वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। यह सेमिनार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा को समर्पित रहा।

दिनभर चले इस वैचारिक एवं राष्ट्रचिंतनात्मक सेमिनार में देश के प्रमुख संतों, विचारकों, सामाजिक चिंतकों, विद्वानों तथा सार्वजनिक जीवन से जुड़े प्रतिष्ठित वक्ताओं ने संघ की शताब्दी यात्रा के विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रनिर्माण से जुड़े आयामों पर गहन विमर्श प्रस्तुत किया।

सेमिनार में पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी, आरएसएस उत्तर क्षेत्र के निवर्तमान संघचालक डॉ. बजरंग लाल गुप्ता जी, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ रणनीतिकार सुनील विश्वनाथ देवधर, वरिष्ठ प्रचारक गोपाल आर्य, पद्मश्री मालिनी अवस्थी, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्वनी उपाध्याय, दिल्ली प्रान्त कार्यवाह सीए अनिल गुप्ता, वरिष्ठ सर्जन डॉ. कौशल कांत मिश्रा, विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विजय शंकर तिवारी, एकल अभियान से राजेश गोयल, सेवानिवृत्त आईपीएस जितेन्द्र गोयल, प्रोफेसर दीप्ति धर्माणी तथा राष्ट्रीय कवि संगम से जगदीश मित्तल ने विशेष सहभागिता की।

कार्यक्रम का शुभारंभ एस. आर. चेरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री संजीव गोयल के स्वागत भाषण के साथ हुआ। कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावी संचालन प्रख्यात राष्ट्रकवि तथा ‘चेतना’ के अध्यक्ष राजेश चेतन द्वारा किया गया।

समापन अवसर पर अध्यक्ष राजेश चेतन जी ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा “यह सेमिनार केवल वैचारिक संवाद का मंच नहीं है, बल्कि राष्ट्रचेतना, सांस्कृतिक आत्मबोध और सनातन मूल्यों को समाज से जोड़ने की एक सतत साधना है।”

वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि संघ की सौ वर्षों की यात्रा केवल संगठनात्मक विस्तार की कथा नहीं, बल्कि यह भारतीय समाज के सांस्कृतिक उत्थान, सामाजिक समरसता, राष्ट्रभाव के जागरण तथा सेवा कार्यों की निरंतर साधना का सशक्त उदाहरण है।

सेमिनार में यह भी रेखांकित किया गया कि संघ ने अपने मूल विचारों के अनुरूप समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ जोड़ते हुए राष्ट्रनिर्माण की प्रक्रिया को निरंतर दिशा और गति प्रदान की है।

उल्लेखनीय है कि ‘चेतना’ एवं एस. आर. चेरिटेबल ट्रस्ट का मूल उद्देश्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रेरणा लेकर भारतीय सनातन परंपरा के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक मूल्यों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाना है। दोनों संस्थाएँ भारतीय मनीषा एवं लोक परंपराओं में निहित जीवन-दर्शन को आधुनिक संदर्भों में प्रस्तुत कर धर्म के वैज्ञानिक, मानवीय एवं सार्वकालिक स्वरूप को सुदृढ़ करने हेतु निरंतर कार्यरत हैं।

संस्थाओं का लक्ष्य सांस्कृतिक आत्मबोध, सामाजिक समरसता, राष्ट्रभाव एवं नैतिक चेतना को जागृत करते हुए सेवा, संवाद और संचार के माध्यम से सनातन मूल्यों की पुनर्स्थापना करना है। विशेष रूप से युवा शक्ति से संवाद स्थापित कर सनातन धर्म को जीवन के व्यावहारिक आदर्श के रूप में प्रस्तुत करना इनका प्रमुख उद्देश्य है।

सेमिनार में बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों तथा युवाओं की उल्लेखनीय सहभागिता रही। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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