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अणुव्रत के नैतिक मूल्यों से ही संभव है विकसित भारत का निर्माण—अर्जुनराम मेघवाल

अणुव्रत मूल्यों के साथ विकसित भारत निर्माण पर गहन मंथन,

अमर चंद्र

नई दिल्ली।अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के तत्वावधान में नई संसद परिसर स्थित संसद पुस्तकालय भवन में “अणुव्रत संसदीय मंच संगोष्ठी” का आयोजन गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। “विकसित भारत के निर्माण में अणुव्रत नैतिक राष्ट्र की आधारशिला” विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में देश के नीति-निर्माताओं, संतों और चिंतकों ने सहभागिता करते हुए नैतिक मूल्यों पर आधारित राष्ट्र निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम में अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य महाश्रमण जी के आज्ञानुवर्ती शासनश्री मुनिश्री विमलकुमार जी तथा डॉ. मुनिश्री अभिजीत कुमार जी का प्रेरणादायी सान्निध्य प्राप्त हुआ।।अपने प्रवचनों में उन्होंने कहा कि अणुव्रत के सिद्धांतों को यदि व्यक्ति, समाज और शासन व्यवस्था में अपनाया जाए तो नैतिकता और सदाचार पर आधारित विकसित भारत का सुदृढ़ निर्माण संभव है।

भारत सरकार के केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री और अणुव्रत संसदीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक अर्जुनराम मेघवाल ने अपने संबोधन में अणुव्रत संसदीय मंच की दृष्टि और उद्देश्य को विस्तार से प्रस्तुत करते हुए “विकसित भारत और अणुव्रत” विषय पर संकल्प से सिद्धि तक की रूपरेखा रखी। उन्होंने आचार्य महाश्रमण के सान्निध्य में लाडनूं में सांसद सम्मेलन तथा दिल्ली में संसद भवन में ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन की भावना भी व्यक्त की।

संगोष्ठी में रेल एवं जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना सहित सांसद अजय भट्ट (उत्तराखंड), गोविन्द कारजोल (कर्नाटक), दर्शन सिंह चौधरी (मध्यप्रदेश), रामचन्द्र जांगड़ा (हरियाणा), सतीश गौतम (उत्तरप्रदेश), डी. के. अरुणा (तेलंगाना) तथा रमिलाबेन (गुजरात) सहित विभिन्न राज्यों के जनप्रतिनिधियों और गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। वक्ताओं ने अणुव्रत आंदोलन को समाज में नैतिक जागरण का प्रभावी माध्यम बताते हुए इसे जन-जन तक पहुँचाने की आवश्यकता बताई।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुनिश्री मधुर कुमार, मुनिश्री अक्षय कुमार, मुनिश्री धन्य कुमार तथा मुनिश्री जागृत कुमार द्वारा अणुव्रत गीत के साथ हुआ। मुनिश्रियों के प्रवचन, प्रेरणा संदेश और सांसदों की जिज्ञासाओं के समाधान ने कार्यक्रम को विशेष ऊँचाई प्रदान की।

अणुविभा के मुख्य न्यासी तेजकरण सुराणा ने अणुव्रत आचार संहिता का वाचन किया। अणुविभा अध्यक्ष प्रतापसिंह दुगड़ ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विषय की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। निवर्तमान अध्यक्ष अविनाश नाहर ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन अणुविभा उपाध्यक्ष एवं योगक्षेम वर्ष संयोजिका डॉ. कुसुम लुनिया ने किया, जबकि आभार ज्ञापन सुरेन्द्र नाहटा ने किया।

इस अवसर पर अणुविभा एवं स्थानीय समितियों से सुरेशराज सुराणा, डॉ. धनपत लुनिया, शान्तिलाल पटावरी, बाबूलाल दूगड़, बाबूलाल गोलछा, विशाल संचेती तथा अमिता चोरडिया सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का समापन मुनिश्री विमलकुमार जी के मंगलपाठ के साथ हुआ। इसके पश्चात परिचय, सामूहिक चित्र तथा सहभोज का आयोजन संसद के भोज कक्ष में किया गया। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह संगोष्ठी विकसित भारत के नैतिक स्वरूप को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।

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