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मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला: राजस्थान रिफाइनरी प्रोजेक्ट की लागत 79,459 करोड़, HPCL करेगा अतिरिक्त निवेश

Amar sandesh नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने एक बड़ा आर्थिक फैसला लेते हुए एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) परियोजना की लागत में भारी बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। अब इस महत्वाकांक्षी परियोजना की लागत 43,129 करोड़ रुपये से बढ़कर 79,459 करोड़ रुपये हो गई है।

इसके साथ ही हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) को 8,962 करोड़ रुपये के अतिरिक्त इक्विटी निवेश की अनुमति दी गई है। इस फैसले के बाद HPCL का कुल निवेश बढ़कर 19,600 करोड़ रुपये हो जाएगा।

राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में बन रही यह रिफाइनरी देश की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड रिफाइनरी परियोजनाओं में से एक है।

क्षमता: 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA)

पेट्रोकेमिकल उत्पादन: 2.4 MMTPA

26% से अधिक उत्पाद पेट्रोकेमिकल होंगे

यह रिफाइनरी हर साल 1 मिलियन टन पेट्रोल,4 मिलियन टन डीजल,1 मिलियन टन पॉलीप्रोपाइलीन LLDPE और HDPE जैसे महत्वपूर्ण प्लास्टिक उत्पाद बेंजीन, टोल्यून और ब्यूटाडीन जैसे केमिकल का उत्पादन करेगी, जो ट्रांसपोर्ट, फार्मा, पेंट और पैकेजिंग जैसे उद्योगों के लिए बेहद अहम हैं।

कब से शुरू होगा संचालन?

सरकार के अनुसार, इस परियोजना की वाणिज्यिक शुरुआत (SCOD) 1 जुलाई 2026 तय की गई है।

रोजगार और अर्थव्यवस्था पर असर यह परियोजना सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि रोजगार और स्थानीय विकास के लिहाज से भी बड़ी साबित हो रही है निर्माण के दौरान 25,000 से अधिक लोगों को रोजगार

पिछड़े क्षेत्र में औद्योगीकरण को बढ़ावा स्थानीय मंगला क्रूड ऑयल का उपयोग विदेशी मुद्रा की बचत।

क्यों है यह फैसला अहम?

यह प्रोजेक्ट भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाएगा ्पेट्रोकेमिकल आयात पर निर्भरता कम करेगा देश को रिफाइनिंग हब बनाने में मदद करेगा

एचआरआरएल (HRRL) एक संयुक्त उपक्रम (JV) है, जिसमें:HPCL की हिस्सेदारी: 74%राजस्थान सरकार की हिस्सेदारी: 26% है।

मोदी सरकार का यह फैसला स्पष्ट संकेत देता है कि भारत अब सिर्फ ऊर्जा उपभोक्ता नहीं, बल्कि ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल उत्पादन का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राजस्थान की यह रिफाइनरी आने वाले समय में देश की औद्योगिक तस्वीर बदल सकती है और “आत्मनिर्भर भारत” के सपने को नई ताकत दे सकती है।

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