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Amar sandesh नई दिल्ली। हिंदी भाषा, साहित्य और भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रचार-प्रसार को समर्पित संस्था डायस्पोरा फाउंडेशन (ऑस्ट्रेलिया) द्वारा 16 मार्च को दिल्ली में एक गरिमामय और प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अमेरिका के अटलांटा से पधारीं प्रख्यात लेखिका एवं रंगकर्मी संध्या भगत को हिंदी भाषा के अंतरराष्ट्रीय प्रचार-प्रसार में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान प्रवासी साहित्य, अमेरिका में हिंदी भाषा की स्थिति तथा समकालीन साहित्यिक सोच और संवेदनाओं पर विस्तृत और सार्थक चर्चा हुई।कार्यक्रम का संचालन वंदिता नयन ने प्रभावी और सुसंगठित ढंग से किया।
संध्या भगत पिछले लगभग 29 वर्षों से ‘ग्रुप दर्पण हिंदी’, बाल थिएटर और नटरंग रंगशाला के माध्यम से हिंदी भाषा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रसार में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वे विदेशों में विद्यार्थियों को हिंदी सिखाने के साथ-साथ रंगमंच और साहित्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि आज हिंदी का प्रभाव विश्वभर में तेजी से बढ़ रहा है।अमेरिका के 60 से अधिक विश्वविद्यालयों में हिंदी को पाठ्यक्रम के रूप में शामिल किया जाना इस बात का प्रमाण है कि हिंदी भाषा वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रही है। इसमें भारतीय सिनेमा और सांस्कृतिक प्रभाव का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
वक्ताओं ने यह भी उल्लेख किया कि मॉरीशस, गुयाना, त्रिनिदाद, सूरीनाम, फिजी और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में हिंदी की जड़ें अत्यंत गहरी हैं, जहाँ यह भाषा बहुसांस्कृतिक समाज का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है।
कार्यक्रम में डॉ. मृणाल कांत पांडेय, डॉ. वीरेंद्र मिश्रा, आनंद मिश्रा, वी.एन. झा, डॉ. दीप्ति अग्रवाल, श्रीकांत भाटिया, जितेंद्र पाण्डेय, मधु शंकर, अनुभूति चतुर्वेदी, राकेश सिंह, पारुल सिंह, दुर्गा प्रसाद मिश्रा, संतोष कुमार सरस, अलका सिंह तथा वरिष्ठ पत्रकारों सहित अनेक विद्वानों, लेखकों, पत्रकारों और चिंतकों ने अपने विचार व्यक्त किए।
डायस्पोरा फाउंडेशन के पदाधिकारियों में प्रेसिडेंट मृणाल कांत पांडेय, सेक्रेटरी जनरल मुकेश सैनी और ट्रेजरर सुधांशु शंकर तिवारी (इंटरनेशनल सीए) ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित धर्मवीर सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अतिथियों ने हिंदी भाषा के वैश्विक विस्तार, भारतीय संस्कृति के संरक्षण और भारत की अंतरराष्ट्रीय पहचान को सुदृढ़ बनाने में ऐसे आयोजनों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन हिंदी को विश्व मंच पर नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में निश्चित रूप से सहायक सिद्ध होंगे।
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