वैश्विक ऊर्जा चुनौतियों के बीच भारत आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहा है: –डॉ. नीरज मित्तल
अमर चंद्र
दिल्ली/गोवा ।वैश्विक ऊर्जा बाजारों में जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद भारत पूरी मजबूती और तैयारी के साथ आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में भी अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विमर्श में अपनी केंद्रीय भूमिका बनाए रखेगा। यह बात केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इंडिया एनर्जी वीक (IEW) 2026 के समापन समारोह के अवसर पर कही।27 से 30 जनवरी 2026 तक गोवा में आयोजित इस प्रतिष्ठित वैश्विक ऊर्जा सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की ऊर्जा नीति विविधीकरण, परिचालन लचीलापन और भविष्य-उन्मुख ऊर्जा संक्रमण पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि भारत ने अब तक आए प्रत्येक वैश्विक झटके को अवसर में बदला है चाहे वह आपूर्ति स्रोतों का विस्तार हो या स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा की दिशा में तेज़ी से बढ़ता कदम।
केंद्रीय मंत्री श्री पुरी ने भारत की वैश्विक स्थिति को रेखांकित करते हुए कहा कि आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता, चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और पेट्रोलियम उत्पादों का प्रमुख निर्यातक बन चुका है।
उन्होंने विश्वास जताया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत ऊर्जा की उपलब्धता, वहनीयता और स्थिरता सुनिश्चित करता रहेगा।
श्री पुरी ने कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG), ग्रीन हाइड्रोजन, एथेनॉल मिश्रण, बायोफ्यूल्स तथा स्वदेशी स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि पारंपरिक ऊर्जा की भूमिका निकट भविष्य में बनी रहेगी, लेकिन स्वच्छ ईंधन भारत के ऊर्जा भविष्य का मजबूत आधार बनेंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ने दिया गया। समय पर किए गए सरकारी हस्तक्षेपों और तेल विपणन कंपनियों के प्रयासों से पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी की कीमतों को नियंत्रित रखा गया तथा संकट के दौर में भी निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की गई।
गोवा में आयोजित इंडिया एनर्जी वीक 2026 के समापन सत्र में डॉ. नीरज मित्तल, सचिव, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि भारत की तेज़ आर्थिक वृद्धि के साथ ऊर्जा मांग में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
उन्होंने घरेलू अन्वेषण एवं उत्पादन को सशक्त करने, रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल्स के एकीकरण तथा तकनीक आधारित समाधानों पर सरकार के फोकस को रेखांकित किया।
डॉ. मित्तल ने बताया कि भारत 2030 तक 5 प्रतिशत CBG मिश्रण लक्ष्य की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, जिसमें राज्यों की सक्रिय भागीदारी और किसानों द्वारा संचालित बायोमास आपूर्ति श्रृंखलाएँ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
इंडिया एनर्जी वीक 2026 का समापन इस स्पष्ट संदेश के साथ हुआ कि भारत ऊर्जा सुरक्षा, वहनीयता और सततता के संतुलन के साथ न केवल अपनी घरेलू आवश्यकताओं को पूरा कर रहा है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में भी एक स्थिर, विश्वसनीय और व्यावहारिक नेतृत्वकर्ता के रूप में सशक्त रूप से उभर रहा है।