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सदाबहार फिल्मी गीतों के कार्यक्रम आयोजित कर मन को शांति और सुकून प्रदान करता है ‘पर्वतीय स्वर सरिता समूह 

सी एम पपनैं

 

नई दिल्ली। कोरोना विषाणु संक्रमण की खौफनाक लहर के मध्य ‘आपदा में अवसर’ के तहत बनी सोच के आधार पर गठित

गीत-संगीत विधा से जुडे़ ‘पर्वतीय स्वर सरिता’ समूह द्वारा 13 जुलाई के दिन कान्हा म्यूजिकल स्टूडियो सैक्टर 2 नोएडा में फिल्मी सदा बहार गीतों से ओतप्रोत प्रभावशाली व यादगार कार्यक्रम आयोजित किया गया। आयोजन के इस अवसर पर प्रख्यात प्रेरणा श्रोत गीत-संगीत, फिल्म व रंगमंच से जुडे़ निर्देशको, गायकों, समाज के प्रबुद्ध जनों तथा पत्रकारों की उपस्थिति में कार्यक्रम आयोजक समूह से जुडे़ कैलाश अस्पताल ग्रुप के प्रबंध निदेशक दिनेश शर्मा का जन्मदिन चर्चित सदाबहार फिल्मी गीतों को गाकर भव्यता के साथ मनाया गया।

 

करीब पांच घंटे तक चलायमान फिल्मी सदा बहार गीतों के इस प्रभावशाली व यादगार आयोजन का शुभारंभ आयोजक समूह से प्रतिबद्ध होकर जुडे़ राकेश धस्माना द्वारा सभागार में उपस्थित सभी गायकों व प्रबुद्ध जनों का परिचय देकर किया गया। सुनील द्विवेदी के द्वारा गाए फिल्म गीत-

तेरी दुनिया में खुशियां बार-बार आए…ए दोस्त ये दुआ मेरी…।

से आयोजित फिल्मी सदाबहार गीतों का श्रीगणेश किया गया।

सदाबहार फिल्मी गीतों के आयोजित आयोजन में नरेश उपाध्याय, राहुल जुयाल, आदित्य ममगाई, राकेश ढौंढियाल, राकेश धस्माना, अनिल धस्माना, नीरज शर्मा, आनन्द भंडारी, संतोष बडोनी, नरेंद्र जोशी, कुसुम बिष्ट, आस्था नौटियाल, अमित भारद्वाज, राकेश द्विवेदी, प्रोफेसर अश्विनी प्रभाकर, ममता कर्नाटक इत्यादि द्वारा एकल सदाबहार फिल्मी गीत तथा किरण लखेड़ा-सुनील द्विवेदी, राखी बिष्ट-दिनेश शर्मा, उमा शर्मा-संजय शर्मा, गंगा ठाकुर-प्रिया ढौंढियाल, अंजू भंडारी-प्रिया ढौंढियाल, आस्था नौटियाल-दिनेश शर्मा इत्यादि गायकाें की युगल जोड़ियों द्वारा मंत्रमुग्ध करने वाले सदाबहार कर्ण प्रिय हिंदी फिल्मी युगल गीत प्रस्तुत कर सभागार में उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देर तक तालियों की गड़गड़ाहट करने को मजबूर किया, आयोजित आयोजन को यादगार बनाया।

आयोजित अयोजन का यादगार समापन ‘पर्वतीय स्वर सरिता समूह’ संस्थापक सदस्य, शौकिया सदाबहार प्रभावशाली व कर्ण प्रिय फिल्मी गीत गायक व कैलाश अस्पताल ग्रुप समूह के प्रबंध निदेशक दिनेश शर्मा के जन्मदिन का केक काट कर तथा सदाबहार फिल्मी जन्मदिवस बधाई गीत गाकर किया गया। फिल्मी सदाबहार गीत-संगीत के आयोजित कार्यक्रम का मंच संचालन मशहूर मंच संचालक प्रेम रावत द्वारा बखूबी प्रभावशाली अंदाज़ में संचालित किया गया।

कार्यक्रम आयोजक ‘पर्वतीय स्वर सरिता समूह’ गठन का इतिहास बड़ा ही ध्यान आकर्षित करने वाला, प्रेरक व रोचक रहा है। वैश्विक फलक सहित हमारे देश के हर गांव, नगर, महानगर के हर घर, गली, मुहल्ले में भयावह महामारी कोरोना ने कहर ढाया हुआ था। हो रही मौतों की खबरों को सुन हर घर में सन्नाटा छाया हुआ था। अफरा-तफरी का आलम था। दुःख से गमगीन जनमानस को ‘आपदा में अवसर’ ढूढने की बात कही जा रही थी।

 

डिप्रेशन की ओर बढ़ते जनमानस के नकारात्मक विचारों को गीत-संगीत के माध्यम से विलुप्त कर एकाग्रता की शक्ति को बढ़ा कर उबारने की सोच के साथ-साथ एक सु-संस्कृत समाज का निर्माण करने के उद्देश्य से कटिबद्ध होकर व संकल्प लेकर आंचलिक व भारतीय गीत-संगीत का संवर्धन कर रही उत्तराखंड पर्वतीय अंचल की दिल्ली प्रवास में निवासरत वरिष्ठ संगीत अध्यापिका किरण इष्टवाल लखेड़ा द्वारा व्याप्त ऐसी महामारी व विपदा के समय दिल्ली प्रवास में निवासरत समाजसेवी अरुण डोभाल, प्रेम रावत, खुशाल सिंह बिष्ट, सुशीला रावत, नीरज शर्मा, शास्त्रीय संगीत गुरु जगदीश ढोढियाल, उद्योग जगत से जुड़े राकेश धस्माना, कैलाश अस्पताल ग्रुप के प्रबंध निदेशक दिनेश शर्मा इत्यादि इत्यादि से मिले सहयोग व सानिध्य के बल सन्नाटे की जद में खोए लोगों को उनके दुखों को भुलाने की एक नायाब पहल के तहत प्रतिबद्ध होकर चिंतन मनन कर ‘पर्वतीय स्वर सरिता’ समूह का गठन कर विभिन्न माध्यमों से लोगों को जोड़ने का कार्य किया गया था।

‘आपदा में अवसर’ के तहत कर्मठ स्कूली संगीत अध्यापिका किरण इष्टवाल लखेड़ा द्वारा स्कूली शिक्षा के साथ-साथ आनलाईन शिक्षा प्रदान करने का बीड़ा उठाया गया। जनमानस के मध्य उत्सुक रही उन छुपी प्रतिभाओं को पहचान, उनको आमंत्रित कर मंच प्रदान करने का कार्य किया गया। खास कर आर्थिक रूप से पिछड़े बच्चों व युवाओं और युवतियों को जो अपनी पारिवारिक परिस्थिति वश बड़े मंचो पर पदार्पण करने से वंचित रह जाते थे, ऐसी छिपी प्रतिभाओं की भरपूर मदद करने के साथ-साथ हर उम्र के उन गीत-संगीत प्रेमियों को उनके शौक पूरे करने, प्रतिभा दिखाने व ख्याति अर्जित करने का प्रभावशाली व दूरगामी कार्य किया गया।

‘पर्वतीय स्वर सरिता समूह’ के बैनर पर किरण इष्टवाल लखेड़ा द्वारा जन-जन तक संगीत विधा पहुंचे, इस उद्देश्य व चाहत के तहत छुपी हुई प्रतिभाओं के बल पहला गीत-संगीत कार्यक्रम का आयोजन समूह से जुडे़ सहयोगियों की मदद से अक्टुबर 2021 में, दूसरा दिसंबर 2021, तीसरा अप्रेल 2022, चौथा 24 जुलाई 2022 तथा उसके बाद विगत वर्षों से निरंतरता बनाए रख गीत-संगीत के कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं। इसके अतिरिक्त उत्तराखंड की गायन में रुचि रखने वाली महिलाओं को जोड़ मांगलिक व अन्य विशेष अवसरों पर मांगल गीत प्रस्तुत करने के लिए ‘स्वर सरिता मांगल ग्रुप’ का गठन कर उत्तराखंड की लोक संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन का कार्य भी शुरू किया गया।

 

‘पर्वतीय स्वर सरिता’ समूह संचालिका, किरण ईष्टवाल लखेड़ा द्वारा भविष्य में गीत-संगीत की अन्य विधाओं के कलाकारों को भी आमन्त्रित कर आयोजन में प्रतिभाग करवाने की योजना को कार्य रूप दिया जा रहा है। कुछ हुनरमंद व प्रतिभावान आर्थिक रूप से अभावग्रस्त गायक कलाकारों की स्कूली शिक्षा, गायन विधा व संगीत वाद्ययंत्रों का खर्च गठित समूह द्वारा वर्तमान में उठाया जा रहा है जो अति प्रशंसनीय व सराहनीय है। प्रतिभावान व अभावग्रस्त कलाकारों को हर स्तर पर मदद कर उच्च मंच प्रदान कर उनकी आकांक्षाओं व मंसूबों को निष्ठापूर्वक पूर्ण करना, ‘पर्वतीय स्वर सरिता समूह’ का मुख्य उद्देश्य बना हुआ है।

संगीत जगत में कुछ अद्भुत कर गुजरने की चाहत रखने वाली किरण इष्टवाल लखेड़ा का मानना रहा है, संगीत विधा में दिन-रात मेहनत कर ही मुकाम को हासिल किया जा सकता है। कठिन समय में संगीत मनुष्य की एकाग्रता को बढ़ाने के साथ-साथ नकारात्मक विचार नहीं पनपने देता है। संगीत शरीर व मस्तिष्क दोनों को लाभ व राहत प्रदान कर शरीर को स्वस्थ व मन को शांत बनाए रखता है। भावनाओं को बढ़ाने में सक्षम है। संगीत के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। संगीत जीवन को सफलता की ओर अग्रसरित करता है। इस विधा को सीखने के लिए शौक, नियमित अभ्यास और अनुशासन जरूरी है।

 

मौलिक आवाज की धनी, गीत-संगीत विधा की वृहद ज्ञानी तथा उत्तराखण्ड के लोकगीत-संगीत व बोली-भाषा से असीम लगाव व पकड़ रखने वाली किरन ईष्टवाल लखेड़ा द्वारा इलाहाबाद प्रयाग विश्व विद्यालय से गीत-संगीत की विधिवत शिक्षा लेने, संगीत गुरु भारद्वाज जी (जयपुर घराना) व दूसरे गुरु मदन लाल गन्धर्व से गीत संगीत विधा का ज्ञान अर्जित करने तथा सु-विख्यात गीतकार शंकर महादेवन के साथ हुए तीन वर्ष के टाइअप में करीब 175 बच्चों को दिल्ली के फिक्की सभागार व मुंबई में कार्यक्रम आयोजित करवाने, स्पिक मैके द्वारा आयोजित गुरुकुल शिक्षा के तहत विभिन्न गीत-संगीत विधाओं की हस्तियों में प्रमुख हरिप्रसाद चौरसिया, डांगर बंधु, इकबाल अहमद, गंगानी इत्यादि के सानिध्य में दर्जनों बच्चों को गीत-संगीत की विभिन्न विधाओं में शिक्षा दिलवाने में मददगार रही हैं।

 

गीत-संगीत विधा में निपुण व समाजसेवी किरण इष्टवाल लखेड़ा का मानना रहा है, संगीत विधा उनके जीवन का आशीर्वाद रहा है, क्यों कि इस विधा ने ही उनके जीवन के साथ-साथ इस विधा में रुचि रखने वाले सैंकड़ों लोगों को मन की शांति व सकुन प्रदान करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ‘पर्वतीय स्वर सरिता समूह’ कटिबद्ध होकर इस उद्देश्य पर निष्ठापूर्वक कार्य कर रहा है।

 

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