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साहित्य और शिक्षा की संगम साधिका:- डॉ. निहारिका कुमारी बनीं नई पीढ़ी की प्रेरणा

Amar sandesh दिल्ली/जमशेदपुर।साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहीं डॉ. निहारिका कुमारी आज अपनी रचनात्मकता और समर्पण के बल पर समाज में विशिष्ट पहचान बना रही हैं। एक ओर जहां वे एक समर्पित शिक्षिका के रूप में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर एक सृजनशील लेखिका के रूप में समाज की संवेदनाओं को शब्दों में ढाल रही हैं।

हिंदी एवं इतिहास में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के उपरांत उन्होंने “19वीं शताब्दी का आदिवासी आंदोलन और राँची एक ऐतिहासिक अध्ययन” विषय पर शोध कर पीएच.डी. की उपाधि अर्जित की। शिक्षण क्षेत्र में उन्होंने जमशेदपुर वर्कर्स कॉलेज में अतिथि प्राध्यापिका के रूप में योगदान दिया तथा वर्तमान में शिक्षा निकेतन, टेल्को (जमशेदपुर) में शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं।

डॉ. निहारिका शिक्षण कार्य के साथ-साथ साहित्य सृजन में भी निरंतर सक्रिय हैं। उनके लेखन में सामाजिक सरोकार, मानवीय संबंधों की गहराई और जीवन के विविध आयामों की सशक्त अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। वे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सेमिनार, वेबीनार और कार्यशालाओं में भी सक्रिय सहभागिता निभाती रही हैं।

समाज में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें प्रांतीय यादव महासभा, पूर्वी सिंहभूम द्वारा ‘समाज रत्न’ सम्मान तथा वरिष्ठ नागरिक समिति, कदमा द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अतिरिक्त टाटा मोटर्स द्वारा आयोजित महिला दिवस समारोह में उत्कृष्ट लेखन के लिए उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। “परीक्षा पे चर्चा” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करने पर उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आभार पत्र भी प्राप्त हुआ है।

डॉ. निहारिका कुमारी का व्यक्तित्व साहित्य, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण का सशक्त संगम प्रस्तुत करता है।अपने निरंतर प्रयास, समर्पण और सृजनशील दृष्टि के माध्यम से वे न केवल अपनी अलग पहचान स्थापित कर रही हैं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनती जा रही हैं। यह जानकारी कोलकाता से शिक्षाविद् विनोद यादव द्वारा अमर संदेश को दी गई।

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