राष्ट्रीयहरियाणा

वंदे मातरम केवल शब्द नहीं, भारतीयों के दिल की धड़कन है — बिप्लब कुमार देब

लोकसभा में ‘‘वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सांसद बिप्लब देब ने संसद में की चर्चा*

Amar sandesh नई दिल्ली। पूर्व मुख्यमंत्री एवं त्रिपुरा से सांसद बिप्लब कुमार देब ने लोकसभा में ‘‘वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विशेष चर्चा में बोलते हुए कहा कि वंदे मातरम एक स्पंदन है और वंदे मातरम हमारे साहस में बसा शब्द है। वंदे मातरम बोलते हुए लाखों वीर फांसी के फंदे पर झूल गए। बिप्लब कुमार देब ने कहा कि 1757 से लेकर 1947 तक 200 साल का अंग्रेजों का शासन रहा।

बिप्लब कुमार देब ने कहा कि हमारा 200 वर्षों का इतिहास भी त्याग, तपस्या, बलिदान, संघर्ष और स्वतंत्रता संग्राम का है। उन्होंने कहा कि इस 200 साल के इतिहास को भी पढ़ना और लिखना पड़ेगा ताकि हमारी नई पीढ़ी बलिदानियों के बलिदान से प्रेरित हो सके और समझ सके। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बलिदान की सिर्फ एक ही लाइन रही और वो है ‘‘वंदे मातरम’’

सांसद बिप्लब देब ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने वंदे मातरम का 150 वर्ष पूरे होने पर देशभर में सरकारी व गैर सरकारी स्तर पर कार्यक्रमों का आयोजन कराया जोकि पूरे वर्ष चलने वाला है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत वंदे मातरम की आज की नई पीढ़ी को जरूरत है, ताकि नई पीढ़ी इसे समझ सके।

सांसद बिप्लब देब ने कहा कि राष्ट्रगीत वंदे मातरम के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय उपाध्याय और सरदार पटेल को जानने की जरूरत है। देश का नागरिक जब देश से प्यार करता है तो देश सशक्त होता है और आगे बढ़ता है। इसलिए इतिहास को याद रखना जरूरी है। लोकतंत्र के मंदिर ससंद में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को प्रणाम करते हुए बिप्लब देब ने कहा कि हमारे ऋषि, मुनियों और बलिदानियों के कारण आज हम स्वतंत्र हैं।

बिप्लब देब ने कांग्रेस नेत्री के एक बयान पर बोलते हुए कहा कि कांग्रेस सिर्फ परिवार के लिए है, जबकि भारतीय जनता पार्टी देश के लिए है। स्वामी विवेकानंद ने भी कहा था कि भारत की हर संतान जिसने भारत में जन्म लिया है वह भारत के लिए है।

चर्चा के दौरान बिप्लब देब ने बंगाल सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आज बंगाल में महिलाएं सुरक्षित नहीं है। हैरानी की बात है कि बंगाल की मुख्यमंत्री महिलाओं को सायं के समय बाहर ना निकलने की सलाह देती है। आरएसएस पर सवाल खड़े करने वालों को आड़े हाथों लेते हुए श्री देब ने कहा कि वंदे मातरम की रचना 1875 में हुई थी जबकि आरएसएस की स्थापना 1925 में हुई थी। आरएसएस के कार्यकर्ता भारत माता का पूजन करते हैं और भारत माता की पूजा तो सनातन काल से चली आ रही है।

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