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बिहार की अस्मिता, एकता और उद्यमिता का विराट संगम: Let’s Inspire Bihar के नेतृत्व में Talkatora Stadium में गूँजा विकसित बिहार @ 2047 का संकल्प

Amar sandesh नई दिल्ली।लेट्स इंस्पायर बिहार (एलआईबी) अभियान ने प्रतिष्ठित तालकटोरा स्टेडियम में बिहार डेवलपमेंट समिट 2026 का आयोजन किया, जो विकसित भारत @ 2047 के अंतर्गत विकसित बिहार के निर्माण के दृष्टिकोण को समर्पित एक ऐतिहासिक, भव्य रूप से सफल एवं राष्ट्रीय स्तर पर गूंजने वाला संगम सिद्ध हुआ। पूर्व दिवस तक 5,000 से अधिक पंजीकरण दर्ज होने तथा देश एवं विदेश से प्रतिनिधियों की सहभागिता के साथ, इस समिट ने अभियान के विस्तृत होते दायरे, विश्वसनीयता और राष्ट्रीय प्रासंगिकता को प्रतिबिंबित किया।

कार्यक्रम का उद्घाटन भारत सरकार के केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह द्वारा किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में उपमुख्यमंत्री (भूमि एवं राजस्व) विजय कुमार सिन्हा तथा उद्योग एवं पथ निर्माण मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल उपस्थित रहे। समिट का नेतृत्व लेट्स इंस्पायर बिहार के मुख्य संरक्षक विकास वैभव, आईपीएस, ने किया।

मंगलाचरण के साथ दीप प्रज्वलन कर समिट का औपचारिक शुभारंभ किया गया, जो बिहार के पुनरुत्थान हेतु सामूहिक संकल्प का प्रतीक बना। कार्यक्रम की शुरुआत एलआईबी के विषयगत गीतों एवं अभियान की चार वर्षीय यात्रा को दर्शाने वाली ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति से हुई, जिसने प्रेरणा एवं उद्देश्य का वातावरण निर्मित किया। कार्यक्रम में कलाकार मनीषा झा, गायक दीपक ठाकुर, नीतू कुमारी नूतन, कवि शंभु शिखर, कवयित्री डॉ. तिष्या श्री एवं कवि नीलोत्पल मृणाल द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं।

लेट्स इंस्पायर बिहार की यात्रा 22 मार्च 2021 को वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी विकास वैभव द्वारा प्रारंभ किया गया लेट्स इंस्पायर बिहार अभियान वर्ष 2047 तक एक विकसित बिहार और परिणामस्वरूप एक विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य रखता है। इसका दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षा, रोजगार या स्वास्थ्य सेवाओं के लिए किसी को बिहार छोड़कर न जाना पड़े। शिक्षा, समता और उद्यमिता के सिद्धांतों पर आधारित यह अभियान बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक और उद्यमशील विरासत से प्रेरणा लेकर जाति और समुदाय की सीमाओं से परे लोगों को राष्ट्रीय विकास के लिए एकजुट करता है। इसके विभिन्न अध्यायों के माध्यम से 3,50,000 से अधिक स्वयंसेवक सक्रिय योगदान दे रहे हैं।

अभियान, वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु बिहार में एक उद्यमिता क्रांति की परिकल्पना करता है। यह स्वरोजगार, स्टार्ट-अप और उद्यमों में प्रवेश करने वाले युवाओं के लिए एक सहयोगी पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रहा है। वर्ष 2028 तक प्रत्येक जिले में पाँच स्टार्ट-अप स्थापित करने का लक्ष्य है, जिनमें से प्रत्येक 100 से अधिक रोजगार सृजित करेगा। वर्तमान में लगभग 600 स्टार्ट-अप इस मंच से जुड़े हुए हैं।

अभियान के गार्गी अध्याय के अंतर्गत बिहार के 16 जिलों में 30 निःशुल्क शिक्षा केंद्र संचालित हो रहे हैं, जहाँ 2,000 से अधिक वंचित बच्चे निःशुल्क शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त बिहार से बाहर निवास करने वाले 103 व्यक्ति, जिनमें कई विदेश में रह रहे हैं, अभियान से प्रेरित होकर अपने गाँवों और पंचायतों के विकास में सक्रिय योगदान दे रहे हैं।

लेट्स इंस्पायर बिहार विकसित भारत @ 2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप एक राष्ट्रीय अभियान के रूप में निरंतर उभर रहा है। आगामी महीनों में बिहार तथा अन्य राज्यों में कई राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम निर्धारित हैं, जो इसके एक संरचित विकास मंच है।

दिल्ली की ताल कटोरा इंदौर स्टेडियम खचाखच भरे हुई सभा को में स्वागत भाषण देते हुए विकास वैभव ने व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद उपस्थित होने के लिए केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा और मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी मंत्रियों, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों, गणमान्य व्यक्तियों एवं प्रतिभागियों, जिनमें लंदन, दुबई और वियतनाम से आए प्रतिनिधि भी शामिल थे, को धन्यवाद दिया। उन्होंने जानकारी दी कि पूर्व दिवस तक 5,000 व्यक्तियों ने कार्यक्रम हेतु पंजीकरण कराया था। अभियान की उत्पत्ति को स्मरण करते हुए उन्होंने 12 जनवरी 2021 की पटना की उस घटना का उल्लेख किया, जब मात्र तीन व्यक्तियों ने बिहार के भविष्य के प्रति आशावाद व्यक्त किया था। उन्होंने तब संकल्प लिया कि यदि आज तीन विश्वास करते हैं, तो कल हजारों करेंगे। आज 3.5 लाख से अधिक लोग इस अभियान से जुड़े हुए हैं।उन्होंने बल दिया कि तालकटोरा स्टेडियम में उपस्थित यह सभा मात्र भीड़ नहीं, बल्कि बिहार के विकास में योगदान हेतु प्रतिबद्ध व्यक्तियों का संगम है। उनके अनुसार उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति परिवर्तन के संकल्प का प्रतिनिधित्व करता है।

भोपाल में अपने विद्यालयीन दिनों को स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि “बिहारी” शब्द का अपमानजनक रूप से प्रयोग कर उनका उपहास किया जाता था। उन्होंने प्रश्न किया कि नालंदा, विक्रमशिला, वैशाली, विश्व के प्रथम गणतांत्रिक गणराज्य और शून्य की अवधारणा देने वाली भूमि को कलंकित कैसे किया जा सकता है। उसी अनुभव ने बिहार की अस्मिता को पुनर्स्थापित करने के उनके संकल्प को आकार दिया। अपनी टिप्पणी स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में भी जातियां थीं, परंतु आज दिखाई देने वाला कठोर और विनाशकारी जातिवाद उस समय समाज की परिभाषा नहीं था। यदि ऐसा क्रूर जातिवाद होता, तो बिहार में नंद वंश का उदय संभव न होता। यदि ऐसे विभाजन हावी होते, तो चाणक्य नेतृत्व गढ़ते समय संकीर्ण पहचानों से परे खोज न करते। उन्होंने कहा, “हम तब भिन्न लोग थे,” और जोड़ा कि एलआईबी जाति, समुदाय, धर्म और लिंग से परे लोगों को एकजुट करने का प्रयास करता है।

उन्होंने दोहराया कि कोई बाहरी व्यक्ति बिहार को परिवर्तित नहीं करेगा; इसकी जिम्मेदारी स्वयं बिहारवासियों को लेनी होगी। लक्ष्य ऐसा बिहार बनाना है जहाँ स्वास्थ्य, शिक्षा या रोजगार के लिए किसी को पलायन न करना पड़े। इसके लिए प्रत्येक पंचायत तक पहुँचने वाली स्टार्ट-अप क्रांति तथा बचपन से ही उद्यमशील आकांक्षा का विकास आवश्यक है। उन्होंने भूमि एवं राजस्व विवादों के समाधान हेतु विजय कुमार सिन्हा के प्रयासों की भी सराहना की और कहा कि औद्योगिक विकास के लिए ऐसे संरचनात्मक सुधार अनिवार्य हैं।

इस महासम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की समग्र प्रगति के लिए बिहार का विकास अपरिहार्य है। बिहार ऐतिहासिक रूप से भारत का बौद्धिक एवं सभ्यतागत केंद्र रहा है और अब उसे देश के आर्थिक एवं औद्योगिक परिदृश्य में अपना यथोचित स्थान पुनः प्राप्त करना चाहिए। वस्त्र, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा ग्रामीण उद्योग जैसे क्षेत्रों में विशाल रोजगार सृजन क्षमता की ओर संकेत करते हुए उन्होंने अभियान की सराहना की।

विजय कुमार सिन्हा ने एक समान विकास लक्ष्य के अंतर्गत तीन लाख से अधिक लोगों को संगठित करने के दृष्टिकोण की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पारदर्शी शासन और संरचनात्मक सुधार बिहार के रूपांतरण की आधारशिला हैं। भूमि एवं राजस्व विवादों के समाधान हेतु व्यवस्थित प्रयास औद्योगिक निवेश और स्टार्ट-अप विस्तार के लिए अनिवार्य पूर्वशर्त हैं।

इस मौके पर संबोधित करते हुए डॉ. दिलीप जायसवाल ने बिहार डेवलपमेंट समिट 2026 को एक गंभीर और नीतिनिष्ठ मंच बताया, जो सरकार के विकास एजेंडा का पूरक है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विस्तार और सड़क अवसंरचना विकास को समानांतर रूप से आगे बढ़ाना आवश्यक है ताकि एक सतत आर्थिक ढाँचा निर्मित हो सके। निवेशक-अनुकूल नीतियाँ, बेहतर संपर्कता और स्टार्ट-अप प्रोत्साहन स्थानीय रोजगार सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित बिहार डेवलपमेंट समिट 2026 विशिष्ट योगदानकर्ताओं के सम्मान और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के अंतर्गत विकसित बिहार के निर्माण के सामूहिक संकल्प की पुनर्पुष्टि के साथ संपन्न हुआ। वातावरण साझा उद्देश्य, उत्तरदायित्व और विचारों को जिला एवं पंचायत स्तर पर क्रियान्वित परिणामों में रूपांतरित करने के नवसंकल्प से ओत-प्रोत रहा।

यह समिट लेट्स इंस्पायर बिहार की यात्रा में एक निर्णायक मील का पत्थर सिद्ध हुआ जिसने यह प्रदर्शित किया कि दूरदर्शी नेतृत्व, नागरिक उत्तरदायित्व, संस्थागत सहयोग और समन्वित जनभागीदारी मिलकर बिहार की विकास यात्रा को नई दिशा दे सकते हैं। यह केवल एक पारंपरिक सभा नहीं, बल्कि एक संरचित राष्ट्रीय मंच के रूप में उभरा, जिसने बौद्धिक विमर्श, उद्यमशील आकांक्षा और शासन सुधारों को विकसित भारत @ 2047 के दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ संरेखित किया। सहभागिता का व्यापक पैमाना, प्रतिनिधित्व की विविधता और विमर्श की गंभीरता ने स्पष्ट किया कि अभियान एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका हैजहाँ आकांक्षा अब संगठित कार्रवाई में रूपांतरित हो रही है।

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