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कोयला क्षेत्र में प्रौद्योगिकी उन्नयन से उत्पादन, सुरक्षा और दक्षता को नई गति :- जी. किशन रेड्डी

Amar sandesh नई दिल्ली। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी की अध्यक्षता में कोयला मंत्रालय से संबद्ध सांसदों की परामर्श समिति की बैठक गुरुवार को आयोजित की गई। बैठक में कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे, समिति के सदस्य, कोयला मंत्रालय तथा कोयला कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में कोयला मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने कोयला कंपनियों में प्रौद्योगिकी उन्नयन से संबंधित प्रमुख नीतिगत पहलों, अब तक हुई प्रगति तथा भविष्य की योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।

कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने बैठक में उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों और समिति के सदस्यों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश में कोयले की मांग स्थिर बनी हुई है और आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए विभिन्न तकनीकी उपायों पर लगातार कार्य किया जा रहा है।

राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि Coal India Limited खनन, अनुसंधान एवं विकास तथा कोयला गैसीकरण के क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूती मिल रही है।

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि वर्तमान समय में प्रौद्योगिकी उन्नयन केवल अवसर नहीं बल्कि कोयला क्षेत्र का स्थायी लक्ष्य बन चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार उत्पादन, सुरक्षा, कार्यदक्षता और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग कर रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कोयला क्षेत्र में तेजी से तकनीकी परिवर्तन हो रहा है। सर्वेक्षण कार्यों में ड्रोन प्रौद्योगिकी, त्रि-आयामी लेज़र स्कैनिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा यंत्र अधिगम आधारित भविष्यसूचक विश्लेषण जैसे आधुनिक साधनों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। इसके माध्यम से पारंपरिक खनन पद्धति से आगे बढ़ते हुए स्मार्ट, सुरक्षित और डिजिटल खनन व्यवस्था की दिशा में तेजी से प्रगति हो रही है।

केंद्रीय मंत्री ने समिति को कार्बन अवशोषण एवं भंडारण, जैव-ईंधन सह-दहन तथा कोयला गैसीकरण जैसी उन्नत तकनीकों को अपनाने के लिए मंत्रालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि निरंतर नवाचार और तकनीक का समन्वित उपयोग ही कोयला क्षेत्र के भविष्य को नई दिशा देगा।

बैठक में कोल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष बी. साईराम ने बताया कि कंपनी अपने सभी परिचालनों में प्रौद्योगिकी का व्यापक उन्नयन कर रही है। अन्वेषण कार्यों के लिए त्रि-आयामी भूकंपीय सर्वेक्षण और ड्रोन जैसे आधुनिक उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है, जबकि दक्षता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए सतत खनन मशीनें तथा उच्च दीवार खनन प्रणाली जैसे आधुनिक साधनों को अपनाया गया है।

उन्होंने बताया कि कोयला परिवहन को अधिक सुगम और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए नए रेल गलियारों, कन्वेयर प्रणाली और आधारभूत संरचना का भी विस्तार किया जा रहा है। इसके साथ ही समेकित उद्यम संसाधन योजना प्रणाली तथा पाँचवीं पीढ़ी के दूरसंचार से समर्थित वस्तु-अंतरजाल आधारित प्रणालियों के माध्यम से डिजिटल परिवर्तन को भी गति दी जा रही है।

बैठक में यह भी बताया गया कि NLC India Limited ने प्रौद्योगिकी उन्नयन और व्यापक डिजिटलीकरण पहलों के माध्यम से अपने संचालन में उल्लेखनीय प्रगति की है। सभी परिसरों और बाहरी परियोजनाओं में भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण के लिए डैशबोर्ड प्रणाली तथा कोयले की आपूर्ति की निगरानी और प्रबंधन के लिए डिजिटल लॉजिस्टिक प्रबंधन प्रणाली लागू की गई है। इसके अलावा जियो-फेंसिंग तकनीक, स्थलीय त्रि-आयामी लेज़र स्कैनर और ड्रोन के माध्यम से खानों का कुशल सर्वेक्षण किया जा रहा है।

इसी प्रकार Singareni Collieries Company Limited में एकीकृत नियंत्रण एवं कमांड केंद्र, त्रि-आयामी लेज़र स्कैनिंग, विभेदक वैश्विक स्थान निर्धारण प्रणाली तथा ड्रोन आधारित भौगोलिक सूचना प्रणाली सर्वेक्षण जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाया गया है। बुद्धिमान कोयला लॉजिस्टिक डैशबोर्ड, दृश्य निगरानी प्रणाली और 410 से अधिक डंपरों में सुरक्षा उपकरणों के माध्यम से परिवहन व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जा रहा है।

बैठक के दौरान समिति के सदस्यों को कोयला खान भविष्य निधि संगठन की तकनीकी पहलों के बारे में भी जानकारी दी गई। समिति के सदस्यों ने मंत्रालय के सक्रिय प्रयासों की सराहना करते हुए प्रौद्योगिकी उन्नयन के माध्यम से कोयला कंपनियों में उत्पादन के अधिकतम और प्रभावी तरीकों को अपनाने के सुझाव दिए।

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