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माता-पिता के संस्कार, संकट में खड़ा रहने का साहस — रोशन रतुड़ी
अमर चंद्र
दिल्ली।देवभूमि उत्तराखंड केवल प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ही नहीं, बल्कि अपने साहस, ईमानदारी और राष्ट्रभक्ति के लिए भी विश्वविख्यात रही है। देश की सीमा हो या जीवन की कोई भी कठिन परीक्षा देवभूमि उत्तराखंड का नागरिक सदैव सबसे पहले पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ खड़ा दिखाई देता है। यही संस्कार उत्तराखंड के उन सपूतों में दिखते हैं, जिन्होंने राष्ट्र सेवा से लेकर सामाजिक दायित्व तक हर मोर्चे पर देश का नाम रोशन किया है।
चाहे देश की राजनीति हो या राष्ट्रीय सुरक्षा का सर्वोच्च दायित्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल हों या देश के प्रथम सीडीएस रहे स्वर्गीय जनरल बिपिन सिंह रावत—उत्तराखंड की माटी ने ऐसे व्यक्तित्व गढ़े हैं, जिन्होंने देश-विदेश में भारत का गौरव बढ़ाया। इसी गौरवशाली परंपरा को सामाजिक सेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ाते हुए आज रोशन रतुड़ी भी उत्तराखंड की एक सशक्त पहचान के रूप में जाने जाते हैं।
देवभूमि उत्तराखंड के लोग आज देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपने परिश्रम, ईमानदारी और संस्कारों के बल पर अलग पहचान बना रहे हैं। इन्हीं विशिष्ट व्यक्तित्वों में एक नाम है,रोशन रतुड़ी, जो मानवता, सेवा और संवेदना का पर्याय बन चुके हैं।
उत्तराखंड के जनपद टिहरी गढ़वाल के हिंडोलाखाल में जन्मे रोशन रतुड़ी वर्ष 1980 से देहरादून में रह रहे हैं और बीते 25 वर्षों से दुबई सहित विदेशों में व्यवसाय कर रहे हैं। किंतु उनका वास्तविक परिचय उनके व्यवसाय से नहीं, बल्कि उनके द्वारा किए गए निःस्वार्थ मानवीय कार्यों से है।
विदेशों में फँसे भारतीयों के लिए संकटमोचक
वर्ष 2000 से अब तक रोशन रतुड़ी विदेशों में फँसे भारतीयों विशेषकर उत्तराखंड मूल के लोगों, की सहायता में लगातार सक्रिय हैं। अब तक वे 20,000 से अधिक लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभा चुके हैं।
उन्होंने अनेक निर्दोष लोगों को विदेशी जेलों से रिहा करवाने, संकटग्रस्त नागरिकों को सुरक्षित भारत पहुँचाने और विदेशों में निधन होने पर सैकड़ों शवों को स्वदेश लाने जैसे अत्यंत संवेदनशील कार्य किए हैं।
ज्ञात श्री रतुडी न केवल भारतीय नागरिकों, बल्कि नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, केन्या, फ़िलीपींस, मिस्र, वियतनाम सहित कई अन्य देशों के नागरिकों की भी संकट के समय मदद की है। रोशन रतुड़ी का मानना है कि इंसानियत की कोई सीमा और कोई देश नहीं होता।
रोशन रतुड़ी केवल एक समाजसेवी ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समाजसेवक के रूप में भी पहचान रखते हैं। वे Human Rights and Crime Control Organisation में Vice President के पद पर रहकर मानवाधिकारों की रक्षा और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।
करोड़ से अधिक की निःस्वार्थ सेवा
मानवता की इस सेवा यात्रा में रोशन रतुड़ी अब तक करोड़ रुपये से अधिक की राशि अपनी निजी आय से खर्च कर चुके हैं। इसमें हवाई टिकट, भोजन, आवास, कानूनी सहायता और केस निस्तारण तक का पूरा खर्च शामिल है। यह सेवा उन्होंने पूर्णतः निःशुल्क, बिना किसी प्रचार और बिना किसी अपेक्षा के की है।
हंसमुख व्यक्तित्व, लेकिन समाज के प्रति अडिग प्रतिबद्धता
रोशन रतुड़ी एक हंसमुख, मिलनसार और सरल स्वभाव के व्यक्ति हैं, किंतु जब बात समाज, प्रदेश या संकट में फँसे लोगों की आती है, तो वे पूरी दृढ़ता और संवेदनशीलता के साथ खड़े रहते हैं। प्रवासी उत्तराखंडियों की समस्याएँ और मानवता की रक्षा उनके जीवन का मूल उद्देश्य बन चुकी हैं।
उत्तराखंड की अस्मिता की एक जीवंत पहचान
आज जब उत्तराखंड के सपूत सीमाओं से लेकर समाज सेवा तक हर मोर्चे पर राष्ट्रध्वज थामे खड़े हैं, उसी श्रृंखला में रोशन रतुड़ी का नाम मानवता और सेवा के क्षेत्र में एक भरोसेमंद पहचान के रूप में लिया जाता है। उनका जीवन यह सिद्ध करता है कि सच्ची देशसेवा पद से नहीं, बल्कि निस्वार्थ कर्म और ईमानदार भावना से होती है।
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