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Amar sandesh दिल्ली/श्रीनगर (गढ़वाल),।हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर गढ़वाल में मौल्यार रिसॉर्ट फाउंडेशन के सहयोग तथा ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग के तकनीकी सहयोग से “उत्तराखंड की महिला कृषि-उद्यमी: स्थानीय ज्ञान से वैश्विक दृष्टि तक सतत आजीविका” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण आजीविका संवर्धन एवं सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में ठोस पहल करना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ पंजीकरण के उपरांत पारंपरिक दीप प्रज्वलन एवं कुल गीत के साथ हुआ। इस अवसर पर शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों तथा चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी और टिहरी जनपदों से आई लगभग 20 महिला कृषि-उद्यमियों ने सहभागिता की।
उद्घाटन सत्र में संगोष्ठी के संयोजक राजेंद्र सिंह नेगी ने स्वागत संबोधन देते हुए कहा कि अनुसंधान को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रखकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने ग्रामीण प्रौद्योगिकी की भूमिका को रेखांकित करते हुए महिला-नेतृत्व वाले विकास को सशक्त बनाने पर बल दिया।
दुर्गा सिंह भंडारी ने अपने संबोधन में महिला उद्यमिता के प्रसार, स्थानीय उत्पादों के महत्व तथा क्षेत्रीय विकास में महिलाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि राज्य का सतत विकास महिला उद्यमियों के सशक्तिकरण पर निर्भर करता है।
हिमालयी क्षेत्रों में महिला कृषि-उद्यमियों की भूमिका सतत विकास के लिए बेहद अहम है।
विशिष्ट अतिथि श्रीमती ममता पांगती ने महिला उद्यमियों के लिए निरंतर मार्गदर्शन, प्रशिक्षण एवं संस्थागत सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कृषि आधारित आजीविका को सुदृढ़ करने और स्थानीय उत्पादों के संरक्षण एवं संवर्धन पर जोर दिया। प्रोफेसर
अजीत कुमार नेगी ने कृषि आधारित आजीविका को मजबूत करने तथा स्थानीय ज्ञान के संरक्षण की आवश्यकता बताई, जबकि प्रोफेसर प्रो. वीरेंद्र सिंह नेगी (अध्यक्ष, DUTA)ने कृषि उत्पादों के गुणवत्तापूर्ण उत्पादन एवं विपणन के लिए बेहतर बाजार तंत्र विकसित करने पर जोर दिया।
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ए.के भागी ने ग्रामीण नवाचार, शिक्षा एवं वैज्ञानिक अनुसंधान की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए सतत विकास के लिए कृषि पारिस्थितिकी ज्ञान को आवश्यक बताया।
मुख्य अतिथि कुलपति प्रोफेसर श्री प्रकाश सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोगी अनुसंधान, स्टार्टअप्स और महिला सशक्तिकरण से जुड़े प्रयासों को पूरा सहयोग देगा तथा वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से विकास को गति प्रदान करेगा।
कार्यक्रम के अंत में एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय एवं मौल्यार रिसॉर्ट फाउंडेशन के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सतत विकास हेतु उपयुक्त तकनीकों की पहचान, क्षमता निर्माण, ज्ञान के आदान-प्रदान तथा सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है।
संगोष्ठी के अंतर्गत आयोजित पैनल चर्चा “हिमालयी क्षेत्रों में महिला कृषि-उद्यमियों द्वारा ग्रामीण परिवर्तन” विषय पर केंद्रित रही, जिसमें विशेषज्ञों, महिला उद्यमियों एवं प्रशिक्षकों ने भाग लिया। चर्चा में स्थानीय उत्पादों के बाजार से जुड़ाव, वित्तीय सहायता, कृषि पहलों को बढ़ावा देने और महिलाओं की भूमिका जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। इंटरैक्टिव सत्र में महिला उद्यमियों ने अपने अनुभव साझा किए। समापन सत्र में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
मौल्यार रिसॉर्ट फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित यह संगोष्ठी उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण, नवाचार एवं सतत ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।
ज्ञात हो कि मौल्यार रिसॉर्ट फाउंडेशन समय-समय पर विभिन्न विषयों पर देश की राजधानी दिल्ली, देहरादून सहित अन्य क्षेत्रों में समाज से जुड़े मुद्दों पर सेमिनार संगोष्ठी, जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता रहता है।
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