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‘महिला भूषण’ से सम्मानित शिक्षिका, 25 वर्षों से हिंदी सेवा में समर्पित अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी छाई
Amar sandesh मुंबई। महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी मुंबई से एक ऐसी शिक्षिका की प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जो न केवल कक्षा में बल्कि डिजिटल दुनिया में भी हिंदी भाषा का परचम लहरा रही हैं। रमावती यादव, जो ‘सोफिया जूनियर कॉलेज’ में वर्ष 2000 से हिंदी शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं, आज हजारों छात्राओं के लिए आदर्श बन चुकी हैं।
संस्कारी परिवार में जन्मीं रमावती यादव ने अपनी प्रारंभिक से लेकर उच्च शिक्षा तक का सफर मुंबई में ही पूरा किया। उन्होंने एम.ए., बी.एड. और एम.फिल. जैसी उच्च डिग्रियां हासिल कीं। वर्ष 2010 में यूनिवर्सिटी ऑफ मुंबई से हिंदी विषय में एम.फिल. करते हुए उन्होंने ‘जगदंबा बाबू गाँव आ रहे हैं’ कहानियों पर शोध किया, जो प्रसिद्ध लेखिका चित्रा मुद्गल के साहित्य पर आधारित था। वर्तमान में वे एस.एन.डी.टी. यूनिवर्सिटी से हिंदी में पीएच.डी. कर रही हैं।
करीब 25 वर्षों के अपने शिक्षण अनुभव में रमावती जी ने न केवल पाठ्यक्रम पढ़ाया, बल्कि छात्राओं के व्यक्तित्व निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया। उनका कोमल और ममतामयी स्वभाव उन्हें छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाता है। छात्र उन्हें केवल शिक्षिका नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और प्रेरणा स्रोत मानते हैं।
डिजिटल युग में भी रमावती यादव पीछे नहीं रहीं। उनका यूट्यूब चैनल “Divya Baatein” आज 17 लाख 32 हजार से अधिक सब्सक्राइबर के साथ छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय है। इस चैनल के माध्यम से वे महाराष्ट्र बोर्ड के हिंदी पाठ्यक्रम को सरल भाषा में समझाकर छात्रों को परीक्षा की तैयारी में मदद कर रही हैं।
उनकी उत्कृष्ट सेवाओं को कई मंचों पर सराहा गया है। वर्ष 2019 में उन्हें ‘महिला भूषण सम्मान’ से नवाजा गया। इसके अलावा 2023 में महाराष्ट्र राज्य जूनियर कॉलेज हिंदी शिक्षक संघ द्वारा ‘आदर्श शिक्षक पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। यादव महोत्सव में भी उन्हें शिक्षण और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मान मिला।
रमावती यादव ने कई राष्ट्रीय संगोष्ठियों और शैक्षिक कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाई है। वे विभिन्न प्रतियोगिताओं में निर्णायक की भूमिका भी निभा चुकी हैं। हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और उसके प्रभावी क्रियान्वयन में उनका योगदान उल्लेखनीय है।
पढ़ना, लिखना, घूमना, सिलाई-कढ़ाई और बुनाई जैसे शौक रखने वाली रमावती जी अपने छात्रों के साथ हमेशा जुड़े रहने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए तत्पर रहती हैं।
, रमावती यादव का जीवन हिंदी भाषा के प्रति समर्पण, शिक्षा के प्रति निष्ठा और समाज के प्रति जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण है। वे आज के समय में शिक्षा और डिजिटल माध्यम का ऐसा संगम हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। अमर संदेशक यह जानकारी कोलकाता से शिक्षाविद् विनोद यादव द्वारा दी गई।
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