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भारत बिजली शिखर सम्मेलन 2026 का आगाज़, सरकारी उपक्रमों की भागीदारी से ऊर्जा क्षेत्र को नई दिशा
अमर चंद्र
नई दिल्ली, 19 मार्च। देश की राजधानी दिल्ली स्थित यशोभूमि सम्मेलन केंद्र में भारत बिजली शिखर सम्मेलन 2026 का भव्य शुभारंभ केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास-शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने किया। चार दिवसीय इस वैश्विक आयोजन में देश के प्रमुख सरकारी ऊर्जा उपक्रमों की मजबूत उपस्थिति ने इसे और भी महत्वपूर्ण बना दिया है। कार्यक्रम का आयोजन ऊर्जा मंत्रालय के तत्वावधान में आज 19 मार्चसे 22 मार्च तक किया जा रहा है।
इस मौके पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी, ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद नाइक, ऊर्जा मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल तथा केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अध्यक्ष घनश्याम प्रसाद सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
इस शिखर सम्मेलन में भारत सरकार के प्रमुख सार्वजनिक उपक्रम जैसे एनटीपीसी लिमिटेड, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, एनएचपीसी लिमिटेड, सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड, ग्रामीण विद्युतीकरण निगम लिमिटेड (आरईसी), टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड और नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (नीपको) सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। इन कंपनियों द्वारा प्रदर्शनी और तकनीकी सत्रों के माध्यम से ऊर्जा क्षेत्र में अपने नवाचार और योजनाओं को प्रस्तुत किया जा रहा है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मनोहर लाल ने कहा कि भारत ऊर्जा परिवर्तन के एक निर्णायक दौर से गुजर रहा है। देश ने निर्धारित समय से पहले 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता का लक्ष्य हासिल कर लिया है। सौर ऊर्जा क्षमता में तेजी से वृद्धि के साथ भारत ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले दस वर्षों में इस क्षेत्र में बड़े स्तर पर निवेश की संभावनाएं बनी हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब केवल अपनी जरूरतें पूरी करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सस्ती ऊर्जा के वैश्विक निर्यातक के रूप में उभरने की दिशा में भी काम कर रहा है। 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के साथ देश ऊर्जा के क्षेत्र में नवाचार, वहनीयता और वैश्विक साझेदारी पर विशेष ध्यान दे रहा है।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि तापीय ऊर्जा अभी भी प्रणाली की रीढ़ बनी रहेगी, लेकिन दीर्घकाल में नवीकरणीय ऊर्जा ही स्थायी समाधान है। उन्होंने संतुलित ऊर्जा परिवर्तन पर जोर देते हुए कहा कि यह बदलाव गति, पैमाने और कौशल के आधार पर आगे बढ़ेगा।
ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद नाइक ने बताया कि वर्ष 2014 के बाद से देश की स्थापित बिजली क्षमता दोगुनी से अधिक हो चुकी है। सौर ऊर्जा क्षमता 143 गीगावाट के पार पहुंच गई है। साथ ही, लाखों परिवार और किसान स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में भागीदारी कर रहे हैं।
ऊर्जा मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े समकालिक बिजली ग्रिड में से एक का संचालन कर रहा है, जिसे आधुनिक संतुलन प्रणालियों, स्मार्ट मीटर और मजबूत नीतिगत ढांचे का समर्थन प्राप्त है।
इस अवसर पर ऊर्जा मंत्रालय ने राष्ट्रीय संसाधन पर्याप्तता योजना और 2035-36 तक 900 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता को ग्रिड से जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना का भी खाका प्रस्तुत किया। इसके तहत बड़े पैमाने पर ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार और आधारभूत संरचना को मजबूत किया जाएगा।
इसी क्रम में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल, केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीपद नाइक तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शिखर सम्मेलन में लगे विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों के प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन कर उनका शुभारंभ भी किया।इस दौरान कंपनियों के अध्यक्षों, निदेशकों एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने मंत्रियों का स्वागत किया और अपनी-अपनी परियोजनाओं एवं नवाचारों की विस्तृत जानकारी दी।
चार दिवसीय इस शिखर सम्मेलन में 100 से अधिक उच्च स्तरीय सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें 300 से अधिक वक्ता, 500 से अधिक प्रदर्शक, 100 से अधिक स्टार्टअप और 25 हजार से ज्यादा प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। सरकारी उपक्रमों की भागीदारी से यह आयोजन न केवल निवेश और नवाचार का केंद्र बना है, बल्कि भारत के ऊर्जा क्षेत्र की वैश्विक नेतृत्व की दिशा में मजबूत कदम भी साबित हो रहा है।
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