Post Views: 0
Amar sandesh
बालोतरा (राजस्थान) | 25 मार्च, 2026।जहाँ एक ओर वर्तमान विश्व युद्ध की विभीषिका और संसाधनों की मारा-मारी से जूझ रहा है, वहीं राजस्थान की धोरों वाली धरती, बालोतरा के कनाना मठ में ब्रह्मांड शांति एवं विश्व कल्याण हेतु आयोजित ऐतिहासिक आध्यात्मिक अनुष्ठान अपनी पूर्णता के साथ संपन्न हुआ। पिछले एक वर्ष से अनवरत चल रहे श्री ललिता महायज्ञ की 365 दिवसीय भक्ति यात्रा का भव्य समापन 24 मार्च 2026 को पूर्ण आहुति के साथ हुआ। इस अवसर पर मेवाड़ और मारवाड़ के कोने-कोने से श्रद्धालुओं का ऐसा अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा कि कनाना की रेतीली धरा भक्ति के सागर में सराबोर हो गई।
इस महायज्ञ का बीजारोपण महंत श्री परशुराम गिरी जी के उस संकल्प से हुआ था, जो उन्होंने गुवाहाटी के कामाख्या मंदिर में ध्यान के दौरान लिया था। पूर्णाहुति के पावन अवसर पर जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज का सानिध्य प्राप्त हुआ और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी यज्ञ कुंड में पूर्ण आहुति देकर विश्व कल्याण और राष्ट्र मंगल की कामना की। महायज्ञ के पूर्णाहुति के दौरान प्रतिदिन 11 लाख आहुतियां दी गईं, जिन्हें विभिन्न गुरुकुलों से आए 1100 विद्वान ब्राह्मणों की टोली ने शुद्ध गाय के घी और वैदिक समिधाओं के साथ 1008 कुंडों में समर्पित किया। इन सभी ब्राह्मणों को ललिता सहस्रनाम तथा दुर्गा सप्तशती कंठस्थ है, जिनकी मंत्रोच्चार की गूँज ने पूरे वातावरण को असीम ऊर्जा से भर दिया।
महायज्ञ के अंतिम दिन आयोजित सांस्कृतिक संध्या में सुप्रसिद्ध जादूगर डॉ. के.सी. पांडेय का ‘आध्यात्मिक जादू’ आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से यह संदेश दिया कि यह संपूर्ण जगत महामाया माँ त्रिपुरा सुंदरी का मनोरंजन मात्र है और हम सभी इस ईश्वरीय नाट्य के पात्र हैं। मैजिशियन डॉ. के सी पांडेय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध करते हुए समझाया कि जिस प्रकार जादू में जो दिखता है वह होता नहीं और जो होता है वह दिखता नहीं, ठीक उसी प्रकार माँ की माया भी अत्यंत सूक्ष्म है जिसे केवल योग साधना और भक्ति से ही समझा जा सकता है। उनके इस अनूठे प्रदर्शन ने अध्यात्म और विज्ञान के समन्वय की एक नई परिभाषा प्रस्तुत करने के साथ दर्शकों की अपार भीड़ के मन को भक्ति भाव से भर आश्चर्य एवं विस्मय करते हुए जीत लिया, जिसके लिए उन्हें मंच पर सम्मानित किया गया। कलश शोभा यात्रा के दौरान जादूगर डॉ. के सी पांडेय, ज्योतिषाचार्या महिमा अग्रवाल एवं डॉक्टर आलोक अग्रवाल भी रथ में सवार रहे।
दिल्ली की सुप्रसिद्ध ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ आचार्या महिमा अग्रवाल को इस विशाल अनुष्ठान की नींव रखने, 1008 यज्ञकुंडों की वास्तु गणना करने और शुभ मुहूर्त निर्धारित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए सम्मानित किया गया। उन्होंने न केवल तकनीकी मार्गदर्शन दिया, बल्कि कलश यात्रा में माता के स्वरूप में विराजमान रहकर भक्तों को अभिप्रेरित भी किया।
समारोह में दिल्ली के वैद्य डॉ. आलोक अग्रवाल को भी उनकी निस्वार्थ चिकित्सा सेवाओं के लिए सराहा गया।
इस महायज्ञ को सफल के बनाने में विभिन्न विशिष्ट व्यक्तियों एवं संगठनों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
सामाजिक समरसता और महिला सशक्तिकरण
यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान न होकर सामाजिक एकता का अनूठा उदाहरण बन गया है। यहाँ जैन, पटेल और राजपुरोहित समाज सहित 36 कौम के लोग कंधे से कंधा मिलाकर व्यवस्थाओं में जुटे रहे। महंत जी के विजन के अनुरूप 1600 कन्याओं द्वारा श्री यंत्र की स्थापना का नेतृत्व करना महिला सशक्तिकरण की एक बुलंद तस्वीर पेश करता है। साथ ही, लाखों श्रद्धालुओं के आगमन से स्थानीय पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जबरदस्त मजबूती मिली है।
भावुक क्षण और सांस्कृतिक संगम
महायज्ञ के दौरान एक भावुक क्षण तब आया जब महंत परशुराम गिरी जी महाराज की माता जी भी वहाँ पहुँचीं। उन्होंने अपने पुत्र को मात्र 6 साल की उम्र में महंत महेंद्र गिरी जी को भेंट कर दिया था। इस विराट आयोजन और जनसैलाब को देखकर वह भाव-विभोर हो गईं। भक्ति के साथ-साथ यहाँ सांस्कृतिक कार्यक्रम और कवि सम्मेलनों ने भी आगंतुकों का मन मोह लिया।

महंत परशुराम गिरी जी के अनुसार, यह महायज्ञ ब्रह्मांड शांति की प्रार्थना के साथ-साथ एक नशामुक्त, संस्कारयुक्त और देशभक्त समाज के निर्माण की एक महत्वपूर्ण सीढ़ी है। इस तीन दिवसीय समापन समारोह ने राजस्थान की धरती पर श्रद्धा और विश्वास का एक नया इतिहास रच दिया है।
Like this:
Like Loading...
Related