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आईएसआईसी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल ने अत्याधुनिक स्पोर्ट्स इंजरी क्लिनिक की शुरुआत की:

भारत का सबसे उन्नत खेल चोट उपचार केंद्र, जो पूरी तरह एकीकृत इलाज सुविधा प्रदान करता है*

Amar sandesh नई दिल्ली । रीढ़, हड्डी और मांसपेशियों के इलाज के लिए प्रसिद्ध आईएसआईसी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल ने एक विशेष स्पोर्ट्स इंजरी क्लिनिक की शुरुआत की है। यह क्लिनिक खेल से जुड़ी चोटों के लिए संपूर्ण, आधुनिक और मरीज-केंद्रित इलाज उपलब्ध कराता है। यह क्लिनिक पारंपरिक उपचार से आगे बढ़ते हुए शरीर की मूवमेंट और बायोमैकेनिकल जांच करता है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि शरीर में कौन-सी कमजोरी बार-बार चोट का कारण बन रही है।

आधुनिक जांच तकनीकों के माध्यम से चोट के मूल कारण की पहचान की जाती है, जिससे दोबारा चोट लगने का खतरा कम होता है। यहां इलाज के लिए बिना चीरा और कम चीरे वाली आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है, जिनमें आर्थ्रोस्कोपी, मिनिमली इनवेसिव स्पाइन सर्जरी (MISS), पीआरपी थेरेपी, स्टेम सेल / बीएमएसी थेरेपी और प्रोलोथेरेपी शामिल हैं। इन तकनीकों से सटीक इलाज, तेजी से रिकवरी और लंबे समय तक बेहतर परिणाम मिलते हैं। प्री-रिहैबिलिटेशन से लेकर सही जांच, सर्जरी और वैज्ञानिक रिहैबिलिटेशन तक, यह क्लिनिक मरीज को एंड-टू-एंड केयर प्रदान करता है।

*मूवमेंट ही मेडिसिन” की सोच पर आधारित यह क्लिनिक उन्नत तकनीक और विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उपचार करता है। यहां मौजूद टेक्नोबॉडी डिजिटल मूवमेंट लैब में डिजिटल मिरर वॉल, 3डी कैमरे और रियल-टाइम बायोफीडबैक की सुविधा है, जिससे एक्सरसाइज के दौरान सही पोस्चर और मूवमेंट तुरंत सुधारे जा सकते हैं। वॉकर व्यू गेट एनालिसिस के जरिए चलने और दौड़ने के तरीके की जांच की जाती है, जिससे शरीर के असंतुलन की पहचान होती है। वहीं प्रोकिन बैलेंस प्लेटफॉर्म दिमाग और शरीर के बीच संतुलन बेहतर बनाने में मदद करता है, जो एंकल स्प्रेन और एसीएल जैसी चोटों से उबरने में बेहद जरूरी होता है।

क्लिनिक में हाइड्रोथेरेपी, कम दबाव वाली रिकवरी एक्सरसाइज, एडवांस्ड रोबोटिक तकनीक और 7K विज़ुअल सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध हैं, जिससे इलाज अधिक सुरक्षित और सटीक बनता है। यहां रिहैबिलिटेशन केवल मास्टर्स डिग्री प्राप्त फिजियोथेरेपिस्ट्स द्वारा किया जाता है, जो न्यूरो-मस्कुलर ट्रेनिंग में विशेषज्ञ होते हैं। इसके साथ नेचुरोपैथी और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित न्यूट्रिशन सपोर्ट भी दिया जाता है, जिससे मरीज जल्दी ठीक हो सकें और भविष्य में दोबारा चोट से बच सकें।

भारत में खेल से जुड़ी चोटों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। अध्ययनों के अनुसार, नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि करने वाले लगभग हर दूसरे व्यक्ति को हड्डी या मांसपेशियों से जुड़ी चोट का सामना करना पड़ता है। इनमें घुटनों की चोट लगभग 28%, टखनों की 18%, कंधों की 10% और रीढ़ की 13% होती है। पिछले 20 वर्षों में युवा खिलाड़ियों में एसीएल इंजरी के मामले 400% से अधिक बढ़े हैं, जिसका मुख्य कारण कम उम्र में अत्यधिक प्रशिक्षण और सही रिहैबिलिटेशन की कमी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में एकीकृत स्पोर्ट्स मेडिसिन सुविधाओं की कमी के कारण कई बार इलाज अधूरा रह जाता है, जिससे चोट बार-बार लौटती है और खिलाड़ियों का करियर प्रभावित होता है। यह नया क्लिनिक इन्हीं कमियों को दूर करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।

आईएसआईसी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल की चीफ स्ट्रैटेजी ऑफिसर सुश्री सुगंधअहलूवालिया ने कहा*कि,“आईएसआईसी की पहचान हमेशा से मूवमेंट और शरीर की कार्यक्षमता को दोबारा बहाल करने से जुड़ी रही है। स्पोर्ट्स इंजरी क्लिनिक इसी सोच का विस्तार है, जहां प्री-रिहैबिलिटेशन और रिहैबिलिटेशन इलाज का सबसे अहम हिस्सा हैं। सही मूवमेंट एनालिसिस और विशेषज्ञों द्वारा दी गई रिहैबिलिटेशन से हम यह सुनिश्चित करते हैं कि खिलाड़ी चोट या सर्जरी से पहले और बाद—दोनों ही स्थितियों में पूरी तरह तैयार रहें।”_

*वहीं डॉ. आशीष चंद्रा, चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर, आईएसआईसी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल ने कहा*,“आईएसआईसी लगातार भविष्य के लिए तैयार आधुनिक चिकित्सा केंद्र विकसित कर रहा है। यह स्पोर्ट्स इंजरी क्लिनिक उसी दिशा में एक बड़ा कदम है, जहां मिनिमली इनवेसिव सर्जरी, रोबोटिक रिहैबिलिटेशन, डिजिटल मूवमेंट लैब, हाइड्रोथेरेपी और रीजेनेरेटिव थेरेपी एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं। इससे खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी।”_

स्पोर्ट्स इंजरी क्लिनिक की शुरुआत के साथ, आईएसआईसी मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल ने उन्नत ऑर्थोपेडिक और स्पोर्ट्स मेडिसिन के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान को और आगे बढ़ाया है। यह क्लिनिक खिलाड़ियों को रिकवरी, बेहतर प्रदर्शन और लंबे समय तक स्वस्थ खेल जीवन के लिए एक आधुनिक और भरोसेमंद मंच प्रदान करता है।

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