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अमर संदेश, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान केंद्रीय विद्युत एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नायक की अध्यक्षता में विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की वित्तीय व्यवहार्यता से जुड़े मुद्दों पर मंत्रियों के समूह की छठी बैठक आयोजित की गई। बैठक की शुरुआत में ही वितरण क्षेत्र की चुनौतियों और सुधारों को लेकर गंभीर मंथन हुआ।
बैठक में उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा, मध्य प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर, राजस्थान के ऊर्जा राज्य मंत्री हीरालाल नागर तथा ऊर्जा राज्य मंत्री मेघना बोर्डीकर सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। केंद्र एवं राज्य सरकारों के अधिकारियों के साथ विद्युत वित्त निगम लिमिटेड (पीएफसी) के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) लिमिटेड की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्रीमती परमिंदर चोपड़ा ने स्वागत भाषण में कहा कि वितरण क्षेत्र की संरचनात्मक और वित्तीय कमजोरियां बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और निरंतरता को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्पादन और पारेषण की सफलता तभी संभव है, जब वितरण क्षेत्र आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो।
बैठक को संबोधित करते हुए श्रीपाद नायक ने कहा कि हाल के वर्षों में डिस्कॉम्स ने पहली बार समग्र रूप से लाभ दर्ज किया है, जो एटी एंड सी हानियों में कमी और एसीएस-एआरआर अंतर घटने का परिणाम है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह सुधार अभी प्रारंभिक स्तर पर है और लगभग आधी कंपनियां अब भी घाटे में चल रही हैं।
उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा,“वित्तीय व्यवहार्यता कोई विकल्प नहीं, बल्कि विद्युत क्षेत्र की आधारशिला है। इसके बिना भारत का ऊर्जा परिवर्तन और विकसित भारत का लक्ष्य अधूरा रह जाएगा।”
श्री नायक ने चेतावनी देते हुए कहा कि लागत के अनुरूप टैरिफ और समय पर सब्सिडी न मिलने के कारण डिस्कॉम्स को महंगे ऋण के दुष्चक्र में फंसना पड़ रहा है। साथ ही, क्रॉस-सब्सिडी की असंतुलित व्यवस्था औद्योगिक उपभोक्ताओं को ओपन एक्सेस की ओर ले जा रही है, जिससे वितरण कंपनियों की आय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
उन्होंने सुधारों के तीन प्रमुख स्तंभ बताए नियामक अनुशासन के तहत समय पर लागत आधारित टैरिफ, निर्णायक सरकारी कार्रवाई के तहत ऋण पुनर्गठन और पेशेवर प्रबंधन, तथा उपयोगिता-आधारित उत्कृष्टता के तहत स्मार्ट मीटरिंग, डिजिटलीकरण और डेटा आधारित दक्षता।
बैठक में विद्युत मंत्रालय के संयुक्त सचिव (वितरण) ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से डिस्कॉम्स की वर्तमान वित्तीय स्थिति और प्रमुख चुनौतियों पर प्रकाश डाला। साथ ही 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों पर भी चर्चा की गई, जिनका उद्देश्य वितरण क्षेत्र की स्थिरता सुनिश्चित करना है।
राज्यों ने बैठक में लागत-आधारित टैरिफ लागू करने के लिए स्पष्ट नीति ढांचा बनाने और डिस्कॉम्स के ऋण पुनर्गठन हेतु केंद्र से सहयोग की मांग की। यह भी स्वीकार किया गया कि वितरण क्षेत्र की अक्षमताओं के कारण अर्थव्यवस्था पर प्रतिवर्ष भारी वित्तीय बोझ पड़ रहा है।
समापन सत्र में श्रीपाद येसो नायक ने राज्यों और अधिकारियों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि मंत्रियों के समूह की सिफारिशें भविष्य के विद्युत सुधारों की दिशा तय करेंगी। उन्होंने राज्यों से अपील की कि वे इन सुधारों को केवल योजना न मानकर एक साझा राष्ट्रीय मिशन के रूप में आगे बढ़ाएं।
बैठक में सभी प्रतिभागियों ने वितरण क्षेत्र की वित्तीय व्यवहार्यता को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की प्रतिबद्धता दोहराई, जिससे देश के ऊर्जा क्षेत्र को दीर्घकालिक स्थिरता और मजबूती मिल सके।
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