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इंडिया एनर्जी वीक 2026: गहरे समुद्र और गैस अन्वेषण से नई ऊर्जा दिशा तय कर रही ओएनजीसी—अरूण कुमार सिंह 

“एक दशक बाद अन्वेषण में लौटी रफ्तार, ओएनजीसी ने दिखाई नई रणनीतिक दिशा”

अमर चंद्र 

दिल्ली/गोवा। इंडिया एनर्जी वीक 2026 के अंतर्गत आयोजित लीडरशिप पैनल चर्चा “अपस्ट्रीम ट्रांसफॉर्मेशन: एक्सप्लोरेशन पोर्टफोलियो में रणनीतिक पुनः सहभागिता” में भारत की नवरत्न ऊर्जा कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अरुण कुमार सिंह ने देश-केंद्रित अन्वेषण रणनीति पर विस्तार से प्रकाश डाला।अपने संबोधन में अरुण कुमार सिंह ने कहा कि ओएनजीसी की अन्वेषण नीति का मुख्य केंद्र गहरे समुद्री क्षेत्रों (डीप-सी) और प्राकृतिक गैस है। उन्होंने बताया कि लगभग एक दशक के बाद भारत में अपस्ट्रीम अन्वेषण गतिविधियाँ फिर से गति पकड़ रही हैं, जिसका प्रमुख कारण आधुनिक तकनीकों में हुआ उल्लेखनीय विकास है।

उन्होंने कहा कि सीस्मिक डेटा संग्रहण, प्रोसेसिंग और सब-सरफेस इमेजिंग में हुई बड़ी तकनीकी प्रगति ने जटिल भू-गर्भीय संरचनाओं में भी बेहतर और सटीक जानकारी उपलब्ध कराना संभव बनाया है। इन तकनीकी सुधारों के साथ-साथ परिचालन दक्षता में आई वृद्धि ने निवेश निर्णयों को अधिक मजबूत बनाया है, जोखिम को कम किया है और परियोजनाओं की व्यवहार्यता को बेहतर किया है।

सीएमडी ओएनजीसी अरुण कुमार सिंह ने अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से ऊपर उठकर दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि अपस्ट्रीम परिवर्तन कोई एक बार की प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक निरंतर यात्रा है। ओएनजीसी के लिए यह परिवर्तन प्रक्रिया अभी प्रारंभिक चरण में है और आने वाले वर्षों में इसके व्यापक और सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ओएनजीसी भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए तकनीक आधारित और रणनीतिक अन्वेषण पर लगातार कार्य कर रही है।

इंडिया एनर्जी वीक 2026 जैसे वैश्विक मंच पर ओएनजीसी की यह प्रस्तुति भारत के अपस्ट्रीम क्षेत्र में नए निवेश, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए एक मजबूत संदेश के रूप में उभरी।

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