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नई दिल्ली। दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा ‘गरिमा के स्वर’ स्वर्ण जयंती कवयित्री सम्मेलन का भव्य आयोजन हिंदी भवन, नई दिल्ली के सभागार में संपन्न हुआ। इस मौके पर कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवयित्री एवं साहित्यकार तथा सम्मेलन की अध्यक्ष श्रीमती इंदिरा मोहन ने की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. रश्मि सिंह, सचिव, महिला एवं बाल विकास कल्याण विभाग, दिल्ली सरकार की गरिमामयी उपस्थिति रही,इस अवसर पर सान्निध्य डॉ. रत्नावली कौशिक, सह मंत्री, हिंदी भवन का प्राप्त हुआ. स्वागताध्यक्ष के रूप में संगीत साधिका संगीता गुप्ता की उपस्थिति रही, सारस्वत अतिथि के रूप में पंडित विजयलक्ष्मी शुक्ल, सुप्रसिद्ध कथा वाचिका एवं साहित्यकार तथा डॉ वीणा भाटिया, हिंदी सेवी एवं शिक्षाविद् की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ मंच पर उपस्थित अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करने के साथ हुआ, संगीता गुप्ता द्वारा मधुर कंठ से सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई ,सम्मेलन की अध्यक्ष श्रीमती इंदिरा मोहन ने सम्मेलन की आठ दशक की साहित्यिक यात्रा, वर्तमान गतिविधियों एवं भावी योजनाओं की जानकारी दी,ओर उन्होंने बताया कि 1976 में पंडित गोपाल प्रसाद व्यास जी की अध्यक्षता में पहली बार कवयित्री सम्मेलन का आयोजन हुआ थाI इस वर्ष हम इसकी स्वर्ण जयंती मना रहे हैं। 
इस अवसर पर आचार्य अनमोल द्वारा संपादित ‘गरिमा के स्वर’ स्मारिका का मंच पर उपस्थित अतिथियों एवं कवयित्रियों द्वारा लोकार्पण किया गया, इसके संपादन में डॉ. नीलम सिंह एवं डॉ. संजीव सक्सेना का विशेष सहयोग रहा।
मुख्य अतिथि के रूप में अपना उद्बोधन देते हुए डॉ रश्मि सिंह ने नारी शक्ति को अभिव्यक्ति के साथ जोड़ने पर सम्मेलन को बधाई देने के साथ-साथ सम्मेलन द्वारा किए गए कार्यों की सराहना भी की उन्होंने कहा कि नारी कोई शब्द नहीं, वह तो पूरी कहानी है।
कवयित्री सम्मेलन का प्रभावी और सरस संचालन सम्मेलन की साहित्य मंत्री प्रोफेसर रचना बिमल ने बड़ी कुशलता के साथ किया,बीच-बीच में उन्होंने प्रसंगानुकूल काव्य पंक्तियों का सटीक समायोजन करके दर्शकों को मंत्र मुग्ध कर दिया।
इस अवसर पर डॉ सीता ‘सागर’ को हिंदी साहित्य एवं भाषा की सेवा के लिए वागीश्वरी सम्मान से अलंकृत किया गया I डॉ सीता ‘सागर’ ने दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मेलन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सम्मेलन द्वारा सम्मानित किया जाना उनके लिए गौरव का विषय है।
सम्मेलन के मुख्य संरक्षक राम कैलाश गुप्ता एवं उनकी धर्मपत्नी कुसुम जी को सम्मेलन के संरक्षण एवं सहयोग के लिए सम्मानित किया गया।
सम्मेलन की अध्यक्ष श्रीमती इंदिरा मोहन जी को कवयित्री सम्मेलन से पिछले 50 वर्षों से जुड़े रहने और मार्गदर्शन के लिए स्मृति चिह्न प्रदान किया गया।
सम्मेलन के उपाध्यक्ष गजेंद्र सोलंकी का इस कार्यक्रम के आयोजन एवं संयोजन में विशेष योगदान रहा।
इस अवसर पर आमंत्रित कवयित्रियों ने अपने सरस काव्य पाठ से सभागार में उपस्थित सभी श्रोताओं का मन मोह लिया, कवयित्रियों में सर्वप्रमुख डॉ सरिता शर्मा, डॉ कीर्ति काले , श्रीमती ऋतु गोयल , श्रीमती अंजू जैन, श्रीमती पूजा श्रीवास्तव, श्रीमती दीपाली जैन और सुश्री मोहिनी राय की कविताओं से पूरे सभागार में तालियों की गूंज सुनाई देती रही, कार्यक्रम के समापन पर सम्मेलन के उपाध्यक्ष प्रोफेसर रवि शर्मा ‘मधुप’ ने सभी आगंतुक अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया।
कार्यक्रम में राकेश शर्मा, डॉ वीणा गौतम, डॉ रंजना अग्रवाल, डॉ नीलम सिंह, ओंकार त्रिपाठी, सुनील विज,संजीव सक्सेना, नवीन झा सहित अनेक साहित्यकार, पत्रकार, हिंदी प्रेमी एवं कॉलेज के विद्यार्थी उपस्थित रहे।
रिपोर्ट प्रस्तुति – सुनील विज।
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