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Amar sandesh नई दिल्ली।पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक संकट के बीच जहां पूरी दुनिया ऊर्जा आपूर्ति को लेकर असमंजस में है, वहीं भारत ने अपनी मजबूत रणनीति और संसाधनों के दम पर हालात को नियंत्रण में बनाए रखा है। संसद में 23 मार्च को प्रधानमंत्री Narendra Modi ने स्पष्ट कहा कि स्थिति “चिंताजनक” जरूर है, लेकिन देश पूरी तैयारी के साथ हर चुनौती का सामना कर रहा है।
Strait of Hormuz से गुजरने वाली ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ते खतरे ने वैश्विक बाजार को झकझोर दिया है। यही मार्ग भारत के लिए कच्चे तेल, गैस और उर्वरक आयात की जीवनरेखा है। इसके बावजूद सरकार की सक्रिय रणनीति और वैकल्पिक प्रबंधों ने देश को बड़े संकट से दूर रखा है।
गैस आपूर्ति में रुकावट और एलएनजी पर 45,50% निर्भरता के कारण कई औद्योगिक क्षेत्रों में सीएनजी और एलपीजी की कमी देखने को मिल रही है। ऐसे में उद्योगों ने तेजी से कोयले की ओर रुख किया है।
आज देश में कोयले की खपत 1.25 अरब टन के पार पहुंच चुकी है,जो साफ बताता है कि संकट की घड़ी में यही भारत की असली ताकत बनकर उभरा है।
जहां गैस आधारित बिजली संयंत्र 25% से भी कम क्षमता पर चल रहे हैं, वहीं कोयला और नवीकरणीय ऊर्जा ने बिजली उत्पादन को स्थिर बनाए रखा है। इससे देश में बिजली संकट की कोई स्थिति नहीं बनी, हालांकि औद्योगिक सेक्टर में दबाव जरूर महसूस किया जा रहा है।
कोल इंडिया के ई,ऑक्शन में फरवरी 2026 में प्रीमियम 35% तक पहुंचना यह दर्शाता है कि मांग तेज हुई है और खरीदार आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटे हैं।
फिर भी स्थिति नियंत्रण में है—केवल 47% ऑक्शन वॉल्यूम की बिक्री और पावर प्लांट्स में 18–20 दिनों का पर्याप्त कोयला स्टॉक किसी भी संभावित संकट को टाल रहा है।
mjunction services limited के एमडी व सीईओ विनय वर्मा के मुताबिक,
“यह साफ संकेत है कि उद्योग अब गैस से हटकर कोयले की ओर बढ़ रहे हैं। मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं में कोयला भारत की ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ बना रहेगा।”
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