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Amar sandesh नई दिल्ली।उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय मुख्य संरक्षक धीरेंद्र प्रताप ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रह रहे चिन्हित राज्य आंदोलनकारियों के मामलों में हो रही देरी पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने राज्य सरकार से इस विषय पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलनकारी देहरादून में जोरदार प्रदर्शन करेंगे।
मंगलवार को दिल्ली में आयोजित एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए धीरेंद्र प्रताप ने धामी सरकार को जनविरोधी करार दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लगातार राज्य आंदोलनकारियों की उपेक्षा कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि 5 फरवरी तक दिल्ली सहित उत्तराखंड के अन्य क्षेत्रों में वंचित आंदोलनकारियों के पक्ष में अधिसूचना जारी नहीं की गई, तो आंदोलनकारी समिति दिल्ली और पूरे उत्तराखंड में आंदोलन शुरू करेगी।
धीरेंद्र प्रताप ने अंकिता भंडारी मामले को लेकर भी राज्य सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने व्यापक जन आंदोलन के बावजूद भी सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने से बच रही है। उन्होंने बताया कि 8 फरवरी को देहरादून में अंकिता भंडारी मामले को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों से शामिल होने का आह्वान किया गया है।
बैठक में पश्चिमी उत्तर प्रदेश निर्माण मोर्चा के महासचिव कर्नल सुधीर कुमार, दिल्ली प्रदेश आंदोलनकारी समिति के संरक्षक अनिल पंत, एमपी नवानी, दाताराम चमोली, रज्जू बिष्ट, पंचम सिंह रावत, प्रताप थलवाल, राधा आर्य, हरिप्रकाश आर्य, एसके जैन, राजीव चौहान, केवल कृष्ण सोलंकी, हरि सिंह, हुकुम सिंह कंडारी, विजेंद्र बिष्ट, रणवीर सिंह पुंडीर और पूरन सिंह रावत सहित कई आंदोलनकारियों ने अपने विचार रखे।
वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान और अधिकारों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी और आवश्यकता पड़ी तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
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