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-डॉ. के सी पांडेय
नई दिल्ली। विश्व ब्राह्मण फेडरेशन (WBF), इंडिया ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के हालिया आदेश पर कड़ी आपत्ति जताते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री को एक औपचारिक ज्ञापन प्रेषित किया है। फेडरेशन का तर्क है कि उच्च शिक्षा में चयन प्रक्रियाओं में किसी भी प्रकार की शिथिलता अकादमिक उत्कृष्टता और संवैधानिक मर्यादाओं के प्रतिकूल है।
संविधान और मेरिट का हवाला WBF ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि UGC का वर्तमान आदेश संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 की मूल भावना के विपरीत है, जो समानता और निष्पक्षता का अधिकार प्रदान करते हैं। संगठन के अनुसार, उच्च शिक्षण संस्थानों में मेरिट आधारित चयन को कमजोर करने से न केवल शोध की गुणवत्ता गिरेगी, बल्कि वैश्विक रैंकिंग में भी भारत की प्रतिष्ठा प्रभावित होगी।
ज्ञापन में मुख्य रूप से अकादमिक स्तर पर होने वाली गिरावटपर ध्यान वह संवैधानिक मूल्यों की रक्षा पर केंद्रित किया गया है। इसमें मेरिट से समझौता करने पर संस्थागत स्वायत्तता और शिक्षा के स्तर में गिरावट की आशंका जताई गई है तथा
संवैधानिक मूल्यों की रक्षा हेतु चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और समानता बनाए रखने की अपील की गई है।
WBF India जिसका मुख्य उद्देश्य भारतवर्ष मैं मेरिट प्रधान सोसाइटी बनाने का है, ने मांग की है कि इस विवादित आदेश को तत्काल वापस लिया जाए या फिलहाल स्थगित किया जाए। इस विषय की गहराई से जांच के लिए एक स्वतंत्र और पारदर्शी समीक्षा समिति बनाने का आग्रह किया गया है।
सामाजिक न्याय और गुणवत्ता का संतुलन जरूरी होने के लिए फेडरेशन के प्रतिनिधियों का कहना है कि सामाजिक न्याय का अर्थ मेरिट से समझौता करना नहीं है। वास्तविक न्याय तभी संभव है जब सभी वर्गों को समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जाए, न कि शैक्षणिक मानकों को कम करके।
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