Post Views: 0
विश्व समस्याओं के चक्रव्यूह में फंसा समाज, समाधान जरूरी : डॉ. शकुंतला कालरा
नई दिल्ली।वर्तमान समय में दुनिया अनेक गंभीर समस्याओं से जूझ रही है और पारिवारिक विघटन, युद्ध तथा ऑनलाइन जीवनशैली के दुष्प्रभाव समाज के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। इन समस्याओं का शीघ्र समाधान अत्यंत आवश्यक है। यह बात प्रख्यात साहित्यकार डॉ. शकुंतला कालरा ने हिंदी प्रतिभा पुंज द्वारा आयोजित साहित्यिक गोष्ठी को संबोधित कर रही थीं। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्याम लाल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रो. हेमंत कुकरेती उपस्थित रहे, जबकि संचालन श्रीमती इंदु मिश्र ‘किरण’ ने किया।
दिल्ली के रानी बाग स्थित सुर सदन में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत दो वर्षीय अनघ शर्मा द्वारा प्रस्तुत वंदना से हुई। इसके बाद श्रीमती सुरम्या शर्मा ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर वातावरण को सरस बना दिया।
संस्था के अध्यक्ष प्रो. रवि शर्मा ‘मधुप’ ने अतिथियों का परिचय देते हुए उनका सम्मान किया। महासचिव डॉ. सुधा शर्मा ‘पुष्प’ ने संस्था की गतिविधियों की रिपोर्ट प्रस्तुत की।
गोष्ठी में पारिवारिक विघटन, युद्ध के कारण और प्रभाव तथा ऑनलाइन जीवनशैली के दुष्परिणाम जैसे विषयों पर वक्ताओं ने विस्तार से विचार रखे।
दिल्ली पुलिस के उपनिरीक्षक ज्योति स्वरूप गौड़ ने कहा कि पारिवारिक संस्कारों की कमी से बच्चों में हिंसात्मक प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो समाज के लिए चिंताजनक है।
डॉ. अनुराधा अग्रवाल (श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स) ने युद्ध के आम जनजीवन पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को रेखांकित किया।
श्री सुनील विज (पूर्व राजभाषा उपनिदेशक, एमटीएनएल) ने ऑनलाइन कार्यों के बढ़ते प्रभाव और उससे उत्पन्न समस्याओं की चर्चा करते हुए अनुशासन और सीमित स्क्रीन टाइम पर जोर दिया।
इस मौके पर वक्ताओं में डॉ. सुधा शर्मा ‘पुष्प’ ने अपनी कविता ‘मन के बंधन’ के जरिए सैनिकों की भावनाओं को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया।
डॉ. राजकुमारी शर्मा ने पारिवारिक विघटन के कारणों और उसके समाधान पर प्रकाश डाला।
डॉ. सुनीत कुमार ने कहा कि युद्ध का मूल कारण स्वार्थ है और परोपकार ही इसका विकल्प है।
श्री शशिकांत शर्मा ने गीत के माध्यम से युद्ध के दुष्परिणामों को समझाते हुए शांति का संदेश दिया।
श्री अभिलाष ने माता-पिता के महत्व को अपने गीतों के जरिए प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। 
इस विचार गोष्ठी के अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो. हेमंत कुकरेती ने युद्ध के दुष्परिणामों पर केंद्रित अपनी कविताओं के माध्यम से श्रोताओं को विचार करने के लिए प्रेरित किया।
वहीं, संस्था के अध्यक्ष प्रो. रवि शर्मा ‘मधुप’ ने अपनी कविता ‘बदला है बहुत कुछ मगर..’ के जरिए युद्ध को मानव की मूल प्रवृत्ति बताया।
इस मौके पर अध्यक्षीय भाषण में डॉ. शकुंतला कालरा ने कहा कि शक्ति की भूख और महत्वाकांक्षा युद्ध के प्रमुख कारण हैं तथा साहित्य समाज को सही दिशा देने का माध्यम बन सकता है।
कार्यक्रम के अंत में प्रो. रवि शर्मा ‘मधुप’ ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया और उन्हें अजवायन का पौधा भेंट कर सम्मानित किया। इसके बाद स्नेहभोज के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
रिपोर्ट : डॉ. सुधा शर्मा ‘पुष्प’
Like this:
Like Loading...
Related