148 करोड़ देशवासियों के भाग्य विधाता हैं बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर
दुनिया के सबसे बड़े विद्वान, विचारक, सच्चे देश भक्त, शोषितों, पिछड़ों पददलितों और नारी के वन्धनों के सबसे बड़े मुक्तिदाता आज ही के दिन यानी 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के मऊ में जन्मे बाबा साहब बी० आर० अम्बेडकर ने भारत को एक ऐसा सविधान दिया, जिसमें दासता से मुक्ति वर्ण व्यवस्था और अशप्रश्यता का अंत, जातिगत व्यवस्था और वर्ण व्यवस्था का खात्मा करने और सब के साथ सबको सम्मान, समता, बन्धुता मैत्री, सदभाव, धर्म-निर्पेक्ष राष्ट्र बनाने के संकल्प को साकार किया।
यह सर्वविदित है कि भारत अनेक काल खण्डों में अनेक शासकों, आक्रान्ताओं और सामंती मुग़ल शासकों और ब्रिटिश हुकूमत द्वारा शासित रहा । बहुत से अताताईयों ने कितने ही आक्रमण किये और भारतीय समाज के मन मस्तिष्क को तोड़ कर रख दिया मुगलों और अंग्रेजों ने लम्बे समय तक भारत पर शासन किया, जिससे हमारी सामाजिक व्यवस्था और जन भावना के साहस और सम्मान को बुरी तरह से प्रभावित किया या यूँ कहें कि सभी देशवासियों को गुलामी का दंश दिया, जिसने लोगों को अन्दर तक तोड़ कर रख दिया | भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के चलते लम्बे संघर्ष के बाद देश को आजादी मिली तो भारत में हजारों सालों से चली आ रही ऊँच-नीच की खाई, अश्पृश्यता, धर्म और जातियों के भेद असमानता, अनेक विध्वंसक व विघटनकारी रूढ़ियाँ और कुरीतियाँ व्याप्त थी । अब देश की बागडोर सम्भालने वालों के लिये यह सबसे बड़ी चुनौती थी कि अब देश आजाद तो हो गया लेकिन देश को एक सशक्त राष्ट्र बनाने और एक सूत्र में बाँधने के लिये कैसी व्यवस्था अपनाई जाये कि देश में अनुशासन व्यावस्था, एक दूसरे के प्रति प्रेम और सम्मान की भावना, लोगों के अधिकार और कर्तव्यों के साथ-साथ लोग निश्चित और सुरक्षित हों और अपने आपको शासित करने के लिये कैसी व्यवस्था अपनाई जाये । न्याय मैत्री, बराबरी का दर्जा, काम चुनने की आजादी, खान पान पूजा अर्चना की आज़ादी देश में कहीं भी रहने-बसने की आजादी, देश की प्रजा को मूल अधिकारों के अंतर्गत उनके जीवन की रक्षा सुरक्षा की गारण्टी दी जाए ।
यह भारत के इतिहास का एक ऐसा निर्णायक दौर था जिसमें सदियों की गुलामी के अन्त के बाद सभी भारतवासियों को अपने भाग्य और भविष्य का फैसला लेते हुए ऐसा सर्वमान्य संविधान बनाना है जो सब पर लागू हो और सभी उस विधान को सहर्ष अंगीकार करें और उसका पालन करें |
अनेकानेक विविधताओं को अपने में समेटे भारत को एक मतबूत और सर्वमान्य संविधान देने के लिये देश के शीर्ष नेतृत्व ने संविधान निर्माण की जिम्मेदारी बाबा साहेब डा० भीमराव अम्बेडकर को दी । उन्हें संविधान निर्मात्री समिति के मुख्य शिल्पी के तौरे पर उस समिति का अध्यक्ष बनाया गया और कड़ी मेहनत के बाद बाबा साहेब ने 26 नवम्बर 1949 को संविधान बनाकर तत्कालीन राष्ट्रपति द्वा० राजेन्द्र प्रसाद को सौंप दिया | जिसके ठीक दो महीने बाद 26 जनवरी 1950 को उसे पूरे देश में लागू कर दिया गया और हम सभी भारतीय पूर्ण प्रभुत्व संपन्न गणतंत्रीय राष्ट्र कहलाए ।
बाबा साहेब ने कोई पहलू ऐसा नहीं छोड़ा जिस पर कानून न बनाया हो । संसार के प्रमुख राष्ट्रों के संविधानो का अध्ययन करने के बाद उन्होंने भारत को एक सूत्र में बांधते हुए संविधान की प्रस्तावना में ही सभी देशवासियों से इस संविधान को लागू करने, अपने आपको समर्पित करने के संकल्प को दोहराया । इसी प्रस्तावना में ही देश के नागरिकों को सभी प्रकार की आजादी, सामाजिक ताने-बाने को सुरक्षित करते हुए सभी को भ्रातृत्व प्रेम और मैत्री के साथ मिलजुल कर देश की तरक्की का मार्ग प्रशस्त करना और राष्ट्र को खुशहाल और गौरवशाली बनाना है | यह संविधान भारत की आने वाली पीढ़ियों के लिए विकास की विरासत का एक जीवंत दस्तावेज़ होगा जो उनके उज्जवल भविष्य का निर्णायक होगा | कुछ लोगों द्वारा यह कहना कि बाबा साहब बी० आर० अम्बेडकर सिर्फ दलितों, पिछड़ों और सर्वहारा वर्ग के ही मसीहा थे, ज़्यादती होगी |
बाबा साहब बी० आर० अम्बेडकर सिर्फ दलितों, पिछडो और सर्वाहारा वर्ग के ही नहीं अपितु, वंचितों, साधन से हीन, गरीब, किसान, खेतिहार मजदूर और देश की 148 करोड़ लोगों के भाग्य विधाता हें क्यूंकि उनके द्वारा बनाया गया संविधान जो शासन की सबसे बड़ी रुल की किताब है पूरे भारत के कोने-कोने में बसे लोगों को शासन और सम्मान देती है उनके मूल अधिकार की गारंटी देती है | भारत सरकार की 52 ग्रुप अ सर्विसेस भारत के नागरिकों को विभिन्न सेवाएँ प्रदान करती हें | इसी संविधान से कौमी एकता, सामाजिक सौहार्द, बंधुता मैत्री के संदेश और कानून और व्यवस्था बनाए रखने में शासन की सजगता सुनिश्चित है | इसी प्रकार बाबा साहब बी० आर० अम्बेडकर ने भारतीय नारियों के लिए सदियों की दास्ताँ समाप्त कर दी उनको हक और अधिकार दिए फिर वह नारी किसी भी धर्म जाति, वर्ण आदि की क्यूँ न हो | बाबा साहब बी० आर० अम्बेडकर ने अनेक रूढ़ियों, आडम्बरों शोषण की शिकार भारतीय नारियों की मुक्ति के लिए कानून बनाए बहु विवाह, बाल विवाह, सती प्रथा आदि का अंत किया महिलाओं को शिक्षा संपत्ति का अधिकार दिया और इसी लिए वह नारी के शोषण के मुक्ति दाता कहलाए | देश की लगभग 60 करोड़ महिलाएं उनके द्वारा बनाए कानूनों से पूर्ण संरक्षित हें | ऐसे युग पुरुष बाबा साहब बी० आर० अम्बेडकर को जितनी श्रृद्धांजलि दी जाए कम है |


