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सितारों से सजी शाम: जादूगर ‘गुरु’ के रिसेप्शन में उमड़ा देश भर के जादूगरों का सैलाब

डॉ. के सी पांडेय, उदयपुर, राजस्थान। राजस्थान की माटी से निकले और देश-दुनिया में अपनी कला का लोहा मनवाने वाले जादूगर ‘गुरु’ (हर्षिल) के विवाह का रिसेप्शन समारोह किसी जादुई उत्सव से कम नहीं रहा। जैसे ही देश के कोने-कोने से दिग्गज जादूगरों ने इस समारोह में शिरकत की, माहौल किसी भव्य मैजिक कॉन्फ्रेंस जैसा प्रतीत होने लगा।
अद्भुत संगम: जहाँ कला और परिवार एक हुए
जादूगर हर्षिल, जिन्हें कला जगत में ‘गुरु’ के नाम से पहचाना जाता है, सुप्रसिद्ध जादूगर आंचल के भाई हैं। कुमावत परिवार की यह विशेषता है कि परिवार का हर सदस्य ‘मैजिक इल्यूजन’ शो से सीधे तौर पर जुड़ा है। जहाँ स्टेज पर हर्षिल और आंचल अपनी जादुई कलाकृतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करते हैं, वहीं परिवार के अन्य सदस्य पर्दे के पीछे इस भव्य शो की कमान संभालते हैं।
अपने बेटे के विवाह समारोह में देशभर से आए जादूगरों के स्नेह और आशीर्वाद को देखकर पिता श्री गिरधारी लाल कुमावत भावुक हो उठे। उनकी आँखों से छलके खुशी के आँसू इस बात का प्रमाण थे कि यह मिलन केवल दो परिवारों का नहीं, बल्कि पूरे जादूगर समाज का था।
दिग्गज जादूगरों की उपस्थिति
इस शाम को यादगार बनाने के लिए देश के कई नामचीन चेहरे एक छत के नीचे जमा हुए। समारोह में सम्मिलित होने वाले प्रमुख नामों में शामिल थे:
डॉ. के.सी. पांडेय, जादूगर राजकुमार, कुलदीप मिश्रा
मेंटेलिस्ट लंकेश सम्राट, दिनेश केम, अखिलेश जैसवाल
जादूगर शिव कुमार, मोगैंबो, राजन, जितेंद्र, जे.पी. सम्राट
देवाशीष मंडल, प्रहलाद राय, अमित सोलंकी, युवराज मंगल एवं जूनियर मंगल
मनोज जैन, मैजिशियन रॉबर्ट, शुभम सोनी एवं आर.के. सोनी
मनोज दीक्षित, चमन लाल, सुनील रावल, सी.के. भामावत, भंवर तलायचा
जादूगर एम. लाल, प्रकाश चौहान, नरेश साहू, राजकुमार शर्मा, कमलेश, विक्रम एवं भौतराम
इतनी बड़ी संख्या में जादूगरों की मौजूदगी ने इस निजी समारोह को एक ऐतिहासिक स्वरूप दे दिया। विवाह उत्सव में आए जादूगरों के लिए कुमावत परिवार ने उदयपुर के पर्यटक स्थलों पर घूमने की भी व्यवस्था करी।

कथनी और करनी का संगम: दहेज मुक्त विवाह की मिसाल

कुमावत परिवार ने इस विवाह के माध्यम से समाज को एक बहुत बड़ा और सकारात्मक संदेश दिया है। जादूगर आंचल और उनका परिवार अपने शो के माध्यम से वर्षों से ‘दहेज मुक्त विवाह’ का प्रचार करते रहे हैं।
“समाज को उपदेश देना सरल है, लेकिन उसे खुद पर लागू करना महानता है।”
इसी सिद्धांत को चरितार्थ करते हुए श्री गिरधारी लाल कुमावत जी ने शगुन के रूप में कन्या पक्ष से केवल 1 रुपया स्वीकार किया। इस सादगी और आदर्श व्यवहार ने उपस्थित सभी मेहमानों का दिल जीत लिया। यह कदम न केवल कुमावत परिवार के सम्मान को बढ़ाता है, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणापुंज भी है।

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